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________________ १४ ध्यान समाधिस्वरूपा अष्ठमी फलपूजा दुहा. ध्यान समाधि योगनुं, फल वर्णन नव थाय; अनंत भवथी भटकती, वृत्ति स्थिर थई जाय. सहु साधनमां श्रेष्ठ छे, ध्यान समाधि योग; पूर्व जन्मना पुण्यथी, पण ते पामे कोक. गेबी वाजां गडगडे, उपमा केम अपाय; अमृत रसना स्नानथी, स्नेहे शांत थवाय. चंचलता आ चित्तनी, ध्यान वडे वश थाय; चढे खुमारी आत्मनी, जन्म मरण पण जाय, संत तणा सहवासमां, योग तणो अभ्यासः गुरु की स्नेहथी, नथी अज्ञात जराय. ढाल - विमलाचलथी मन मोरे, म्हने गमे न बीजे क्यांय. ए रोग. ॥५॥ ॥१॥ 112.11 11311 ॥४॥ बुद्धिसागर सद्गुरुनोरे, जश वर्यो चारे पास; सुखकारक सेवक जननीरे, पूरण करता सहु आश. बुद्धि० ए टेक० धरी धर्मध्यानमां प्रीति, जग प्रेमे लीधु जीती; राखी साधुनी रीतरे, कीधो उरमां उज्जास. बुद्धि. ॥ १ ॥ जगनुं सुख जाण्युं काचुं, जाण्युं प्रभुनुं सुख साचुं; हुं एज गुरुने याचुरे, मारो होजो चरणे वास, बुद्धि ॥२॥ कर्यो जन्म परम उपकारी, तजी दुनीयां केरी यारी; प्रभु भक्ति कीधी प्यारीरे, तोड्या नरकना त्रास. बुद्धि. ॥ ३ ॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034839
Book TitleGurupad Puja
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAjitsagarsuri
PublisherShamaldas Tuljaram Shah
Publication Year1926
Total Pages122
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size7 MB
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