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________________ २१ गलत स्नेह बिंदु मुनि राया, ___ त्यागे भोजन मन वच काया ॥ और० २॥ रसना वस जो सरस आहारी, चउ गति दुख पावे वो भारी। दूध दही पकवानको चावे, पापं श्रमण जिन आगम गावे ॥ और० ३॥ मांदक आहारसे मन्मथ जागे, __ इस कारण ब्रह्मचारी त्यागे। रसना जीपक गृही अनगारी, नमन करत जगमें नरनारी ॥ और० ४॥ नीरस भोजनसे तनु पोषे, धर्म साधन मानी संतोषे । आतम लक्ष्मी प्रभु ब्रह्मचारी, वल्लभ हर्ष नमे सय वारी ॥ और० ५॥ दोहरा। त्यागी नर परनारका, त्यागे परनर नार । संतोषी निज निज प्रति, ब्रह्मचारी सागार ॥१॥ पर्व तिथि व्रत पालते, नरनारी महा भाग। उनको भी नव वाडका, होता है अनुराग ॥२॥ १ दुद्धदही विगईओ, आहारेइ अभिक्खणं । अरए अ तवोकम्मे, पावसमणित्ति वुच्चह ॥ १६ ॥ (श्रीउत्तराध्ययनसूत्र अध्ययन १७)। भैक्षप्रसक्तो हि यतिर्विषयेष्वपि सजति । (मनुस्मृ० अ० ६) तथा, यात्रामात्रमलोलुपः । यावता प्राणयात्रा वर्त्तते तावन्मानं भैक्षं चरेत् । अलोलुपो मिष्टानव्यञ्जनादिष्वप्रसक्तः । [याज्ञवल्क्यस्मृति-मिताक्षरा-यतिधर्मप्रकरण ।] Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034794
Book TitleCharitra Puja athva Bramhacharya Vrat Puja
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijayvallabhsuri
PublisherBhogilal Tarachand Zaveri
Publication Year1925
Total Pages50
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size6 MB
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