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________________ जीव-विज्ञान ही इस तैजस शरीर के भी बंधे रहते हैं। यह तैजस शरीर हमारे अंदर ऊर्जा प्रदान करता है। इस तैजस शरीर से ही हमारे अंदर गर्मी पैदा होती है। अगर हमारे शरीर के अंदर गर्मी न रहे तो आप ठंडे पड़े और मरे। जब कोई आदमी मर जाता है तो दूसरे व्यक्ति अपने हाथों से उसे छूकर यही देखते हैं कि उसका शरीर ठंडा पड़ गया है या अभी भी गरम है। यदि आदमी मर गया है तो उसका शरीर ठंडा पड़ जाता है। क्योंकि आत्मा निकल गई और उस आत्मा के साथ ही वह तैजस शरीर भी निकल गया। जैसे ही यह तैजस शरीर निकल जाएगा उसके शरीर की कान्ति निकल जाएगी। आपके शरीर का जो Temprature 98.4F या 37°C जो बना हुआ है वह इसी के कारण बना हुआ है। अगर आपके शरीर का Temprature बढ़ रहा है तो समझना इस तैजस शरीर के अंदर का Function गड़बड़ा रहा हैं। इस तैजस शरीर को अगर आप सही बनाकर रखेंगे तो आपके शरीर में जितनी भी गर्मियाँ हैं वह सही रहेगी। क्योंकि शरीर में आग है, जिसे जठराग्नि कहते हैं। जठर का अर्थ है-पेट । पेट की अग्नि को जठराग्नि कहते हैं, उस अग्नि से ही आपका शरीर चल रहा है। यदि वह अग्नि समाप्त हो जाए तो आपका जीवन भी समाप्त हो जाएगा। आप कहते हो-भूख लग रही है या पेट में चूहे कूद रहे हैं। इसका मतलब यह हुआ कि पेट के अंदर की अग्नि भड़क रही है। इस शरीर के अंदर की जो आग है, उस आग को बनाये रखने का काम भी इस तैजस शरीर का ही है। शरीर में ताप बनाए रखना, जठराग्नि को बनाए रखना और फिर शरीर में जहाँ-जहाँ भी Process चलते हैं जिनके लिए energy की जरूरत पड़ती है जो हमें शरीर के भिन्न-भिन्न भागों में काम में आती हैं। जिनके माध्यम से शरीर के अंदर स्वतः ही रक्त, मज्जा, माँस आदि बनते चले जाते हैं। इन सारी चीजों का Formation इसी तैजस शरीर की बहुत बड़ी ऊर्जा के माध्यम से चलता रहता है। इस तैजस शरीर को आप Manage भी कर सकते हैं, इसको Recharge भी कर सकते हैं। इस तैजस शरीर को आप रिचार्ज करके कर्मों के पास भी उस अग्नि को पहुँचा सकते हैं और अपने कर्मों को भी जला सकते हैं। क्योंकि तैजस और कार्मण शरीर बहुत पास-पास रहते हैं। जब आप ध्यान करेंगे तो आपमें जो सबसे ज्यादा ऊर्जा आती है वह आपके अंदर से ही आती है। वह ऊर्जा इस तैजस शरीर के चार्ज होने से आती है। आपका तैजस शरीर जितना ज्यादा चार्ज होगा उतनी ही ज्यादा आप ऊर्जा महसूस करेंगे। जब भी हम अपने आपको सुस्त महसूस करेंगे तब हम ध्यान और प्राणायाम के माध्यम से अपने अंदर की ऊर्जा को पुनः पैदा कर सकते हैं। उसके लिए यह तैजस शरीर ही सबसे ज्यादा सहायक होता है। इस तैजस शरीर पर प्रभाव पड़ा और इसने आपको ऊर्जा प्रदान की, आपको कान्ति भी प्रदान की। इसी कारण आपका शरीर चलता रहता है। इसलिए ध्यान में इसी को रिचार्ज किया जाता है। ध्यान करते समय हम इस शरीर के पास पहुँचे तो हमारे अंदर बहुत अधिक energy आ जाएगी। कोई भी डॉ. उपकरण के माध्यम से बाहर से तभी तक सहायता कर पाता है जब तक उस शरीर में ऊर्जा इस तैजस शरीर के माध्यम से पहुंच रही हो।। शरीर से खून बह रहा है, ब्लड की गति शरीर के अंदर बहुत ज्यादा है, अपने फेफड़े बहुत तीव्र गति से काम करते हैं। प्रत्येक समय शरीर के अंदर इतनी पम्पिंग होती रहती है जितनी पम्पिंग आप अपने मुँह से नहीं कर पाओगे, इन सबके लिए जो एनर्जी मिलती है वह सब इस तेजस शरीर से ही 69
SR No.034717
Book TitleJeev Vigyan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPranamyasagar
PublisherAkalankdev Vidya Sodhalay Samiti
Publication Year
Total Pages88
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size1 MB
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