SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 46
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ -AnARANA vAAAAAAAA (३०) श्रीसुधर्मगड परीक्षा. सहस वरसे पाम्या रिछेद, सत्यमित्रथी एहज जेद||१०२ सहस थहोतेर वरसें जाण, वीर पनी पोषालमंडाण; पोरबकी बरसे चउदसे, पडस अधिके जाणो रसे१८३ः बड देठे वडगह थापिया, चनरासी थाचारज किया; . ते चउरासी म जाणवा, वडगठाना मन थाणवा ||१०४ सहनी सामाचारी एक, तेह मांहि नव द अनेक; बमपीपलसीकांतीजोय, बोकमायाजाखडीयाहोय॥१०५ हारेजा जीराउल नाम, एवमादि चनरासी गम; एक उपाध्याय अलगो हतो, काले गुरुपासें पूहतो॥१०॥ तेरे पण श्राचारज कीयो, पंचासीमो गढ थापायो; तेथी केटले काले जोय, राजसनामां चर्चा होय ॥१०॥ कंस पात्र गाथी जीकली, खरतर नाम ग्व्यो तिहां वल); विद्युत्तरश्रधिकवरससयसोल, कीधोआचारणादंदोल१०० बोज एकसोने चोवीस, फेरे जिनवल्लन सूरीस; वल। अनेरा गछ उसवाल, कोरंटा संडेरा वाल ॥१०॥ धर्मघोष नाणा पलिवास, बे वंदणिक चित्रावास वित्रावासअनेब्रह्माणिया, मलधारावादिकजाणोया॥११० एहनी नुत्पत्त नवि जाणीये, अणदो क्यांथो श्राणोये; . थणसांजल्युथदीकुंकहे, तेनरथतिघणपातिकलहे ।१११ वरस 'सोलसें उगणत्रीस, पुनमगह थापन जगीश; वीरसंवत. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034619
Book TitleSudharm Gaccha Pariksha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBramharshi Muni
PublisherRavji Desar
Publication Year1912
Total Pages94
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy