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________________ ( ४ ) श्री सुधर्मगध परीक्षा. कासग्ग चैत्यवंदननो फेर, दीसे किदां कोइ अधिकेर; सूत्रे जेहनी हा ना नहिं, तिद एकांत न करीए सहि ॥ १३ निरवद्यक्रिया संवेगी तणी, एक दीसे श्रापमति तणी; तिहपुणयाज विचारीकरी, सत्यकरोकुरूं परिही ॥१४॥ सूत्र अर्थ शुद्ध श्राचार, सौधर्मगष्ठ तेनो अणुसार; तेथी छावर मतंतर जाण, सूत्रार्थ तिथे करो प्रमाण ॥ १५ नवला गठ नवला याचार, तिणें म राचो एक लगार; सौधर्मगवनी पालो याण, जेथी पामो परम कल्याण ॥१६ परंपरने निसदीस, वरस सदस ज्यांलगी इकवीस; रदेशे सूत्रार्थ श्राधार, जे पाले ते साधु विचार ॥ १७ नाम गठ ने सूत्र विरुद्ध, परंपरा तसु म गणो सुद्ध; सूत्र विरुद्ध गद्य जे यादरे, ते जिनश्राण जंग श्राचरे ॥१७ गणाअंगे एद विचार, सूत्र पंथ गछ रीति धार; चचंगी बोले जगदीस, ते जोइ मम करसो रीस ॥१७ यतः - श्री ठाणांगे ॥ चत्तारिपुरिसजाया पन्नत्ता तंजहा - धम्मंणाममेगे जहति णो गण द्वितिं १ गए द्वितिमेगे जहति णो धम्मं. २, धम्ममेगे जहति गणधितिंपि ३, एगे णो धम्मं यो गणधितिं ४ " जावार्थ:- एक -एटले कोइक साधुतो एहवा होय Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034619
Book TitleSudharm Gaccha Pariksha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBramharshi Muni
PublisherRavji Desar
Publication Year1912
Total Pages94
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
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