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________________ +00000000000000000000000000000 * करूँ कहाँ तक वर्णन इसका ? बहुत विषय कहनेका है, दया-वृक्षको तोड दिया, बी बोया निर्दयताका है। आर्द्रभावको दूर किया, निज मन पाषाण बनाया है, ऐसे तेरापंथ मजबने, जगमें गजब मचाया है ॥ दया दयाका नाम पुकारें, दया नहीं जाने लवलेश, ___ 'दुःखीको दुखसे छोडाना,' कही दया यह ही परमेश। इसी दयाको, पर, नहीं जानें, मानें मन जो आया है, ऐसे तेरापंथ मजबने, जगमें गजब मचाया है । " जीव मारनेसे लगता है, पाप एक, मारे उसको, . () पाप अठारों लगे उसीको, मरतेको परिपाले जो ।” * यह सिद्धान्त खास है इसका, इसमें सब कुछ आया है, () ऐसे तेरापंथ मजबने, जगमें गजब मचाया है ॥ "जो कुछ देना सो हमको दो, मत दो और किसीको कुछ, __ नहीं पात्र हैं और जगत्में, हमहीको समझो सब कुछ ।" साध्वाभासोंकी यह शिक्षा, नवीन पंथ चलाया है, ऐसे तेरापंथ मजबने, जगमें गजब मचाया है। • अब कुछ सुनो सूत्रकी बातें, जो इसने पलटाई हैं, नहीं समझकर अर्थ इन्हींके, कुयुक्तियाँ दिखलाई हैं। mher () Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034608
Book TitleShiksha Shatak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherAbhaychand Bhagwan Gandhi
Publication Year1915
Total Pages28
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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