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________________ 0000000000000000000000.00... भेजी प्रतिमा अभयकुंवरने, आर्द्रकुमरके पास सही, देख, हुआ उस समय उसीको 'जातिस्मरण' ज्ञान वहीं । सुयगडांगके छठे अध्ययनमें, यह अधिकार बताया है, ऐसे देखो अजब मजबने, जगमें गजब मचाया है। .000000000 * कहें कुपंथी 'भेजा ओघा, ' नहीं तत्त्वको सोचा है, ओघेको कहता आभूषण क्या ? उसने जो सोचा है। * इसी कल्पना हीके कारण, नहीं तत्त्वको पाया है, 6 ऐसे देखो अजब मजबने, जगमें गजब मचाया है । ५८ दोइने जिन प्रतिमा पूजी, ज्ञौता यह फरमाता है, ___ स्पष्ट पाठ मिलने पर, क्यों यह मूढमती शरमाता है ? । प्रभुपूजा-प्रभुदर्शनके विण, यों ही जन्म गमाया है, ऐसे देखो अजब मजबने, जगमें गजब मचाया है । ५९ * देव-देवियोंको मानें, फिर जाकर नाक घिसाते हैं, प्रभुपतिमाके आगे जानेको, क्यों ये हिचकाते हैं ? । नहीं शरम आवे इनको, यह नवीन पंथ चलाया है, ऐसे देखो अजब मजबने, जगमें गजब मचाया है ।। 0 . नाम ' अहिंसा के दिखलाए, उसमें 'पूजा ' दिखलाई, १ द्वितीय श्रुतस्कंधमें । २ द्रौपदी। 3 पृ० १२५५ । 8.000000000000000000000000000 (१४) Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034608
Book TitleShiksha Shatak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVidyavijay
PublisherAbhaychand Bhagwan Gandhi
Publication Year1915
Total Pages28
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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