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________________ ५६. त्यारे हवे करवु शु ? धर्म संबंधी बाबतोमां दरम्यानगिरी करवानी भलामण करवाने अमे खुशी नहोता अने तेथी पोताना धर्ममां समाजने नुकसान थाय तेवी अपाती दीक्षामा पेठेलो सडो पोते थईनेज दूर करवा बाबतो समाज अटकावी शके नहीं तो ते अटकाववानी राज्यनी अमे अमारी आगळ रजु थयेला तेम बीजा जैन गृहफरज. स्थोने सूचना करी हती. पण तेमनामां बे पक्ष पडी गयेला होवायी अने सुधारकोनें कहेवु कोई रीते माने एका जूना विचारवाळा नहीं होवाशी तेम संघ पण पहेलां जेवो योग्य नियमन करवानी सत्तावाळो नहीं रहेलो होवाथी आ बाबतमां सरकारे योग्य ते दरम्यानगिरी करवानी भलामण अमारे न छुटके करवी पडे छे. श्रीमंत सरकार पण धर्म संबंधो बाबतोमा दरम्यानगिरी साधारण रीते करता नथी पण न छुटके समाज अने धर्मना संरक्षण माटे जरूर होय त्यारेज तेमने ते प्रजाना एकंदर हितने माटे ते नाईलाजे करवी पडे छे ए वात जाणीती छे. बाळलग्न विगेरे सामाजिक सुधारानी बाबतमा ज्यारे प्रजार पोते थईने कांई न कर्यु अने एवो अनिष्ट रिवाज चालतो रहेवायी प्रजानी शारीरिक, मानसिक अने नैतिक स्थिति बगडती जती जणाई त्यारे न छटके सरकारे प्रजाना हितने माटे बाळ लग्ननी बदी बंध करवा कायदाथी दरम्यानगिरी करवानी पोतानी फरज स्वीकारी हती. बाळलग्ननी अटकायत कायदाथी करवानी पहेल श्रीमंत गायकवाड सरकारे करी त्यारे तेना सामे घणो विरोध करवामां अव्यो हतो; पण हवे तो ते आशीर्वाद समान देखाय छे अने तेनुं अनुकरण बीजां राज्योमां पण थयेलं छे. इंडिया सरकारे पण बाळलग्ननी अटकायत माटे शारदा अॅक्टने नामे ओळ वाय छे ते कायदो हालमां को छे अने १४ वर्षयी कमी उमरनी कन्याओ अने १८ वर्षथी कमी उमरना वरना लग्न करवानुं कृत्य गुन्हो गणी तेने माटे शिक्षा ठरावी छे. एवीज रीते आ दीक्षानी बाबत जो के धार्मिक छे तोपण तेनुं योग्य नियमन न रहेवाथी बाळको तेमां होमाई समाजनी नैतिक, धार्मिक अने आर्थिक स्थितिने नुकसान थवानो संभव रहे छे तेथी जो प्रजा योग्य नियमन न करी शके तो सरकारे ते करवानी सरकारनी फरज छे. संन्यास एटले दुनियाना कामकाज छोडी दई मात्र धर्म काममां निमग्न रहेg; जेनी लायकी अने इच्छा होय ते भले ते प्रमाणे करे; पण ए काम शुं छे ए समजे नहीं एवा बाळकोने पण तेमा तेमना संबंधीनो संमति वगर दाखल करी लेवामां आवे तेथी समाजने उघाडी रीते नुकसान छे अने ते जो समाज पोते थईने न अटक.वी शकती होय तो ते अटकाववानी राज्यनी फरज छे. ५७. श्रीमंत सरकारे प्रसिद्ध करेला खरडानो विरोध करनारा तरफयी एवी दलील र करवामां आवे छे के सरकारथी दीक्षा जेवा धार्मिक दीक्षाना विरोधीओनी दलील. "" कार्यमां कांई दरम्यानगिरी थई शके नहीं; १६ वरसनी अंदरना दोक्षाना उमेदवारो माटे ज्यां माबाप विगेरेनी संमतिनी अपेक्षा राखेली छे त्यां ते लेवाय छे अने १६ वरसनी उपरना माटे कोई बीजांनी संमतिनी आवश्यकता Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034601
Book TitleSannyas Diksha Pratibandhak Nibandhna Musadda Uper Vichar Karva Nimayeli Samitinu Nivedan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSanyas Diksha Pratibandhak Samiti
PublisherSanyas Diksha Pratibandhak Samiti
Publication Year1932
Total Pages96
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size5 MB
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