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________________ (६८) पत्रीमार्गप्रदीपिका। शनेनवाब्जा १९ नगभूमिता १७ विदो नगा ७ स्तु केतोरनलानखाः २० कवेः॥४२॥ अब दशासाधन कहते हैं, जिसमें प्रथम विंशोत्तरी कहते हैं:-कृत्तिका नक्षत्रको आदिले क्रमसे प्रथम सूर्यकी ६ छह वर्षकी दशा, फिर चंद्रकी १० वर्षकी, मंगलकी ७ वर्षकी, राहुकी १८वर्षकी,गुरुकी १६वर्षकी, शनिकी १९ वर्षकी,बुधकी १७वर्षकी,केतुकीवर्षकी, शुक्रकी,२० वर्षकी दशा जानना॥४२॥ र च । म | १६ | १६ । १० । के । २० | अ भ. अष्टोत्तरीदशा। खेः ६षडिन्दोस्तिथयो १५ ऽष्ट भूभुवो नगेन्दवो १७ ज्ञस्य शनेर्दिशो १०गुरोः । नवेन्दवो १९ ऽगो रवयः १२ समाः सिते धराश्विनो २१ वेदहुताशमे शिवात् ॥४३॥ अष्टोत्तरीदशाके वर्षादि मान कहते हैं-आनिक्षत्रको आदि ले क्रमसे प्रथम चार नक्षत्र (आ० पु० पु. आ.)की, सूर्यकी ६वर्षकी दशा, फिर तीन नक्षत्र (म. पू. उ.) की चंद्रकी १५ वर्षकी, फिर चार नक्षत्र (ह.चि.स्वा. वि.) की भौमकी ८ वर्षकी, फिर तीन नक्षत्र (अ. ज्ये. म.) बुधकी १७ वर्षकी, फिर चार नक्षत्र (पू. उ. भि. श्र.) की शनिकी १० वर्षकी, फिर तीन नक्षत्र (ध. श. पू.) की गुरुकी १९ वर्षकी, तदनंतर चार नक्षत्र (उ. रे. अ. भ.) की राहुकी १२ वर्षकी, तदनंतर तीन नक्षत्र (क. रो. म.) की शुक्रकी पर्षकी भष्टोत्तरी दशा मानना ॥ १३॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034576
Book TitlePatrimarg Pradipika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahadev Sharma, Shreenivas Sharma
PublisherKshemraj Krishnadas
Publication Year1851
Total Pages162
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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