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________________ वर्षप्रदीपकम् । कोणोनशुके विवाहभायें ॥३०॥ शुक्रमेंसे शनिको हीन करनेपर विवाह और भार्या (स्त्री ) सहम होवे हैं ॥ ३०॥ ज्ञोनेज्य आधानम् ॥३१॥ गुरुमेंसे बुधको हीन करनेसे आधान ( गर्भ ) सहम होता है ॥ ३१ ॥ सदा चन्दोनमन्दे षष्ठान्विते सन्तापः ॥३२॥ दिनका इष्ट हो वा रात्रिका सदा शनिमेंसे चन्द्रको हीन करना और उनमें ६ छठा भाव मिलानेसे सन्ताप सहम होता है ॥ ३२ ॥ सदा भौमोनसिते श्रद्धा ॥ ३३ ॥ दिनका इष्ट हो वा रात्रिका सदा शुक्रमेंसे भौमको हीन करनेसे श्रद्धासहम होवा है ॥३३॥ सदा पुण्योनज्ञाने प्रीतिः ॥ ३४॥ सदा दिनका इष्ट हो वा रात्रिका ज्ञान सहमोमेंसे पुण्य सहमको हीन करना प्रीति सहम होता है ॥ ३४॥ मन्दोनारे ज्ञान्विते जाज्यम् ॥३५॥ . मंगलमेंसे शनिको हीन करना और उसमें बुध युक्त करे तो जाड्य सहम होता है ॥ ३५॥ शश्वज्ज्ञोनारे व्यापारः ॥ ३६॥ सदा (दिनरात्रिके इष्टमें) भौममेंसे बुधको हीन करे तो व्यापार सहम होता है ॥ ३६॥ चन्द्रोनार्कजे जलपातः॥३७॥ शनिमेंसे चन्द्रको हीन करे तो जलपाव सहम होता है ॥ ३७॥ अर्कजोनभौमे शत्रुः ॥३८॥ भौममेंसे शनिको हीन करे तो शत्रु सहम होता है ॥ ३८॥ बुधोनपुण्ये ज्ञान्विते दारिद्रयम् ॥३९॥ पुण्य सहममेसे बुधको निकालने और उसमें बुध युक्त करनेपर दारिद्रय सहम होता है ॥ ३९ ॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034576
Book TitlePatrimarg Pradipika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMahadev Sharma, Shreenivas Sharma
PublisherKshemraj Krishnadas
Publication Year1851
Total Pages162
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size27 MB
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