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________________ श्री जैन इतिहास ज्ञान भानू किरण नं. ६ श्री रत्नप्रभसूरि सद्गुरुभ्यो नमः प्राचीन जैन इतिहास संग्रह (छट्ठा माग ) ०००० (श्रोसवालोत्पत्ति विषयक) शंकाओं का समाधान पकेश वंश अर्थात् प्रोसवाल वंशोत्पत्ति का समय निर्णय करना एक जटिल समस्या है। क्योंकि इस विषय के निर्णय के लिए जितने साधन चाहिए उतने आज उपलब्ध नहीं हैं केवल इसके लिए ही नहीं पर भारतीय किसी भी विषय के इतिहास लिखने में ये ही बाधाएँ सर्व प्रथम श्रा उपस्थित होती हैं। इसका खास कारण गत शताब्दियों में मुस्लिम शासन का महान् अत्याचार और धर्मान्धता ही है क्योंकि उन्होंने भारतीय इतिहास के प्रधान साधनों को नष्ट भ्रष्ट कर दिया। उन्होंने कई एक पुस्तक. भण्डार यों के यों जला दिये, असंख्य मन्दिर मूर्तिएँ तोड़ डाली सैकड़ों शिलालेख व कीर्तिस्तम्भ बर्बाद कर दिए एवं जनता के धार्मिक अधिकारों पर सावातिक चोट कर जनता में चिर अशान्ति का बीजा रोपण किया गया इस तरह पूर्व लिखित इतिहास को नष्ट कर भविष्य में भी उसे सिलसिलेवार लिखे जाने से रोक रक्खा, फिर भी जो कोई साधन इतस्ततः विखरे हुए शेष रह गए उनमें भी अधिकांश उनके जीर्णोद्धार करते समय विशेष लक्ष्य न देने से लुप्त प्राय होगएअन्ततोगत्वा जो कुछ भी आज ऐतिहासिकों के हाथ लगा है उन्हीं पर Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.034571
Book TitleOswalotpatti Vishayak Shankao Ka Samadhan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyansundar Maharaj
PublisherRatnaprabhakar Gyanpushpamala
Publication Year1935
Total Pages60
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size25 MB
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