SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 82
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ धिज्जं विसासिय सम्मयं अणुमयं बहुमयं भण्डकरण्डगसमार्ण रयण-करण्डगभूयं माणं सीयं माणं उन्हें माण खुहा माणं पिवासा माणं वाला माणं चोरा माणं दंसमसगा वाइय पित्तियं कप्फियं संभीमं सणवा विविहा रोगायंका परीसहा उवसग्गा फासा संतु धैर्यशाली | धारण करने योग्य । विश्वास करने योग्य | मानने योग्य । सम्मत । विशेष सम्मान को प्राप्त । बहुमत (बहुत माननीय ) जो देह । आभूषण के करण्डक (करण्डिया डिब्बा) के समान । रत्नों के करण्डक के समान जिसे । शीत (सर्दी) न लगे। उष्णता (गर्मी) न लगे । भूख न लगे 1 प्यास न लगे । सर्प न काटे । चोरों का भय न हो। डांस व मच्छर न सतावें । वात । पित्त । कफरूप त्रिदोष । भयंकर | सन्निपात रोग न हो । अनेक प्रकार के । रोग (संबंधी पीड़ाएँ) और आतंक न आवे । क्षुधा आदि परीवह । उपसर्ग। देव, तिर्यंच आदि द्वारा दिये गये कष्ट । स्पर्श न करें ऐसा माना किन्तु अब । {80} श्रावक सामायिक प्रतिक्रमण सूत्र
SR No.034373
Book TitleShravak Samayik Pratikraman Sutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorParshwa Mehta
PublisherSamyaggyan Pracharak Mandal
Publication Year
Total Pages146
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size2 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy