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मुहालद्ध मुहाजीवी भुजेज्जा दोसवज्जिय।
(द ५ (१) १६ ग, घ) मुधाजीवी गुनि मुधालब्ध और दोष-वर्जित आहार को समभाव से खाये।
दुल्लहा उ मुहादाई मुहाजीवी वि दुल्लहा।
(द ५ (१)
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१०० क, ख)
मुधादायी दुर्लभ है और मुधाजीवी भी दुर्लभ है।
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मुहादाई मुहाजीवी दो वि गच्छति सोग्गइ।
(द ५ (१) १०० ग, घ)
मुघादायी और मुधाजीवी-दोनो सुगति को प्राप्त होते
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