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________________ मैं कर सकता हूं और वह तो भी दयालु रहेगा। इसलिए जब भी मैं उसके सामने खड़ा होऊंगा, मैं कहूंगा, रहीम, रहमान- ओ करुणामय ईश्वर! मैंने पाप किये हैं, लेकिन तुम करुणापूर्ण हो। यदि तुम वास्तव में करुणापूर्ण हो, तब मुझ कर करुणा करो।' सो उमर खय्याम शराब पीता रहा। जिसे वह पाप समझता था उसे भी करता रहा। लेकिन उसने इसको बड़े विकृत ढंग से प्रतिपादित किया है। सारी दुनियां भर में लोगों ने यही किया है। भारत में हम कहते हैं, 'यदि तुम गंगा हो आओ, यदि तुम गंगा में सान करो,तो तुम्हारे पाप धुल जायेंगे।' यह अपने आपमें एक सुंदर धारणा थी। यह बहुत बातों को दर्शाती है। यह बतलाती है कि पाप कोई गहरी चीज नहीं है। यह तुम पर पड़ी धूल की तरह है। यह धारणा कहती है, 'इससे बहुत ग्रसित न हो जाओ, अपराधी मत अनुभव करो। यह धूल मात्र है, और भीतर तुम निर्दोष बने रहते हो। गंगा में सान करना तक मदद कर' सकता है! ' ऐसा तुम्हारी मदद के लिए कहा गया है, ताकि तुम पाप में इतने आविष्ट न हो जाओ, जैसा कि ईसाई धर्म हो गया है। अपराध इतना बोझिल हो गया है कि गंगा में सान करना तक मदद करेगा। तुम्हें इतना डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन हमने इसके कैसे अर्थ लगाये हैं! हम कहते हैं, 'तो पाप करते जाना ठीक ही है।' और कुछ समय बाद जब तुम अनुभव करते हो कि अब तुमने बहुत पाप कर लिये, तो तुम गंगा को एक अवसर देते हो कि वह तुम्हें शुद्ध करे। तो तुम वापस आ जाते हो और फिर पाप करते हो। विकृति का केंद्र यह कार्य कर रहा है। मन की तीसरी वृत्ति है-कल्पना। मन के पास कल्पना करने की क्षमता है। यह अच्छा है, यह संदर है। और वह जो संदर है, कल्पनाशक्ति के दवारा उतरा है। चित्रकारी, कला. नत्य. संगीत. जो भी सुंदर है, वह कल्पना दवारा जख्मी है। लेकिन जो असुंदर है, वह भी कल्पना दवारा आयी है। हिटलर, माओ, मुसोलिनी, वे सब कल्पनाशक्ति द्वारा बने हैं। हिटलर ने सुपरमैन की, अतिमानवों वाली दुनिया की कल्पना की। उसने फ्रेडरिक नीत्से को माना, जिसने कहा था, 'उन सबको समाप्त कर दौ, जौ कमजोर है। उन सबको नष्ट कर दो जो श्रेष्ठ नहीं हैं। पृथ्वी पर केवल महामानवों को बचा रहने दो।'तो हिटलर ने विनाश किया। लेकिन यह मात्र कल्पना है, केवल आदर्शवादी कल्पना यह मानना कि केवल कमजोर का विनाश करके, असुंदर को नष्ट करने भर से, शारीरिक स्वप्न से अपंग का विनाश करने भर से ही तुम एक सुंदर संसार पा जाओगे। लेकिन सब से कुस्वप्न चीज जो इस संसार में संभव है वह विनाश ही तो है-यही विनाश! तो हिटलर कल्पनाशक्ति दवारा कार्य कर रहा था। उसके पास कल्पना थी-एक यूयोपियन कल्पना, अव्यावहारिक। वह अत्यधिक कल्पनाशील व्यक्ति था। कल्पनाशक्ति-संपन्न व्यक्तियों मे से एक था हिटलर। उसकी कल्पना इतनी मतांध और इतनी उन्मत्त हो गयी कि अपने कल्पनापूर्ण संसार
SR No.034095
Book TitlePatanjali Yoga Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorOsho
PublisherUnknown
Publication Year
Total Pages467
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size4 MB
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