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________________ राजाकीका सभा में बिराजमान थे। तब अंतिम देशना के प्रारंभ होने से पूर्व पुण्यपाल राजा को उसी रात्री में सोलह स्वप्न आए थे। राजा के बिनती करने पर परमत्मा ने स्वप्नों का फलकथन करा था । इनफलादेशोंको भी देशना की मान्यता प्राप्त रही। इन स्वप्नों में छट्ठा स्वप्न पद्म सरोवर था। इस स्वप्न की विचित्रता यह थी कि इस सरोवर का नाम तो पद्म सरोवर था परंतु उसमें एक भी कमल-पद्म नहीं था। उसने परमात्मा से पूछा प्रभु! यह कैसा विचित्र स्वप्न कि जिस सरोवर में एक भी कमल न हो उसे पद्म सरोवर कैसे कहा जा सकता है ? प्रभु ! ऐसा सोच सोचते मैं ने सरोवर के आसपास घूमते हुए पूरे सरोवर को प्रदक्षिणा दी। प्रदक्षिणा करते हुए भी पूरे सरोवर में मैं ने एक भी कमल नहीं देखा। वापस लौटते समय गाँव में प्रवेश करते हुए कुडे पर कमल उगा हुआ देखा यह देखकर मुझे अत्यंत आश्चर्य हुआ। आप मुझे स्वप्न का रहस्य समझाइए । परमात्मा महावीर ने इस स्वप्न का रहस्य प्रगट करते हुए कहा कि, जैसे ये सरोवर खाली दिखाई दे रहा है उसी तरह मेरे निर्वाण के बाद भरतक्षेत्र रुप सरोवर तीर्थंकर रूप कमल से रहित हो जाएगा। इस तरह तीर्थंकर रुप कमल इस भरतक्षेत्र में नहीं रहेगा ऐसा सुनकर तीर्थंकर के विरह की वेदना हमें अवश्य होती हैं परंतु गणधर भगवंत कहते हैं, सरोवर खाली था पर कूडे पर कमल उगा था उसी तरह संसार के कूडे में भी पुरिसवर पुंडरियाणं का कमल नमोत्थु का द्वारा खिलती है। कोई भी समय हो कोई भी क्षेत्र हो परंतु हमारे साधना के सरोवर में नमोत्थुणं द्वारा परमात्मा सदा उदित रहते हैं । प्रभु के शास्वत स्वरुप की अनुभूति अर्थात् नमोत्थुणं पुरिसवर पुंडरियाणं । स्वप्न का उत्तरार्ध समझाते हुए परमात्मा कहते हैं, वत्स ! कूडे के उपर का कमल इस रहस्य को प्र करता हैं कि परिवार कूडे जैसा हो तब भी माता पिता कमलवत रहेंगे। आप आँख बंद करो राजन् ! तुम्हारे भीतर भविष्य में होनेवाला तुम्हारे स्वप्न का रहस्य ध्यान में प्रगट हो रहा है। राजा पुण्यपाल ने आँखे बंद कर एक अजीब घटना देखी उन्होंने देखा कि एक आदमी एक घडे में से सात खाली घडे में पानी उंडेल रहा था। आश्चर्य तो इस बात का था कि समान दिखाई देने वाले सातों घडे इस एक घडे में से भरे जाने के बाद भी कोई घडा अपूर्ण या खाली नहीं था। साथ ही उसने एक ओर आश्चर्य देखा कि, जिस एक घड़े में से सात घडे भरे गये थे उन सात घडों में से खाली हुए एक घडे को भरना शुरु किया गया तब ये सात घडे मिलकर उस खाली हुए एक घडे को भर नहीं पाऐं। राजा ने कहा, भगवंत! ऐसा विचित्र दृश्य देखकर मैं सहसा जाग उठा। भगवान ने कहा, वत्स! भविष्य में एक समय ऐसा आयेगा कि माता पिता सात-सात बच्चों का पालन पोषण कर पाऐंगे परंतु सात-सात बच्चे एक साथ मिलकर माँ या बाप का पोषण नहीं कर पायेंगे। दोनों का एक साथ अवसर आते ही बच्चे माँ-बाप को बाँट लेंगे । माता पिता एक दूसरे के पास बारी बारी से रहेंगे। आजकल आप व्यवहार में देख रहे हैं कि माता पिता की अवदशा हो रही है। अब तो सात नहीं दो बेटे होते हैं एक माँ को रखता है ओर एक बाप को रखता है। हमारा एक परिचीत कर्पल हमारे पास आया था। कह रहे थे, हर वक्त हम आपके पास आकर एक दिन रुककर चले जाते है परंतु इस बार हमने आठ दस दिन का प्रोग्राम बनाया हैं क्योंकि हम दोनों यही पर एक दूसरे के साथ आए है वहाँ तो हमें बच्चों ने बाँट रखा हैं। वापर ने को पैसे नहीं देते हैं, घरमें फोन भी लॉक रहता है। हम एक दूसरें से सुख-दुःख की 78
SR No.032717
Book TitleNamotthunam Ek Divya Sadhna
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyaprabhashreeji
PublisherChoradiya Charitable Trust
Publication Year2016
Total Pages256
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size26 MB
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