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________________ क्रम प्रकृति नाम | उत्कृष्ट स्थिति सं| यत्स्थिति । कर्म प्रकृति ११ | अप्रत्याख्यानचतुष्क | आवलिकाद्विक हीन| आवलिका हीन ४० १२ | प्रत्याख्यानचतुष्क |४० को.को. सागरोपम को. को. सागरोपम संज्वलन क्रोध उत्कृष्ट संक्रम स्वामी गुण पहला गुण. जघन्य स्थिति यत्स्थिति । जघन्य संक्रम संक्रम प्रमाण स्वामी गुणस्थान आवलिकाहीन पल्यो| पल्योपमासंख्येय ९वें गुणस्थान परिशिष्ट ] पम संख्येय भाग भाग , अन्तर्मुहूर्तहीन २ मास आवलिकाद्विकहीन २ मास | अन्तर्मुहूर्तहीन १ मास मास आवलिकाद्विकहीन १ मास संज्वलन मान | आवलिकाद्विकहीन | आवलिकाहीन ४० | ४० को. को. सागरो. को. को. सागरो. पहला गुण स्थान संज्वलन माया ११ पक्ष "१ पक्ष संज्वलन लोभ एक समय समयाधिक आवलि, १०वां गुणस्थान | सान्तर्मुहूर्त संख्यात| ९ वां गुणस्थान हास्यषट्क आवलिकात्रिकहीन | आवलिकाद्विकहीन ४०को. को. सागरो.| ४०को. को. सागरो. संख्यात वर्ष प्रमाण वर्ष स्त्रीवेद नपुंसकवेद पुरुषवेद नरकायु | अबाधाहीन३३सागरो. आव.हीन. ३३सागरो. पल्यासंख्य भाग | सान्तर्मुहूर्त पल्या संख्य भाग अन्तर्मुहूर्तहीन ८ वर्ष| आवनिकाद्विकहीन ८ वर्ष एक समय | समयाधिकआवलि. १, २, ४ गुण. १, २, ४, ५ गुण. १ से ११ गुण. १, २, ४ गुणस्थान तिर्यंचायु , ३ पल्य " ३पल्य मनुष्यायु देवायु " ३३ सागरोपम , ३३ सागरोपम | छठा गुणस्थान [ ४२५
SR No.032438
Book TitleKarm Prakruti Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivsharmsuri, Acharya Nanesh, Devkumar Jain
PublisherGanesh Smruti Granthmala
Publication Year2002
Total Pages522
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size39 MB
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