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________________ गाथा ६२ - गाथा ६३ गाथा ६४ गाथा — — I गाथा ६६ — गाथा ६७ गाथा • ६८ - । ६५ _ गाथा ६९ ← — गाथा ७० गाथा ७१ अप्रमत्त संयत गुणस्थान में गिरने के बाद की स्थिति का वर्णन उपशय सम्यक्त्वकाल में मरण होने पर भवसंबंधी वर्णन उपशमश्रेणी में पतन के समय यथा गुणस्थान होने वाले करणों का वर्णन स्त्रीवेद और नपुंसकवेद के उदय से उपशमश्रेणी के आरोहण का वर्णन उपशमश्रेणी में उपशांत मोहनीयकर्म की प्रकृतियों का प्रारूप देशोपशमना का लक्षण देशोपशमना के भेद देशोपशमना के स्वामी दर्शनमोह और अनंतानुबंधी की देशोपशमना का विधान चारित्रमोह प्रकृतियों की देशोपशमना का विधान देशोपशमना में मूल प्रकृतियों की सादि-अनादि प्ररूपणा ध्रुवसत्ता वाली प्रकृतियों की सादि-अनादि प्ररूपणा उद्वलनयोग्य और तीर्थंकर व आयुचतुष्क की सादि-अनादि प्ररूपणा देशोपशमना में मोहनीय कर्म के प्रकृतिस्थान और उनके स्वामी नामकर्म के प्रकृतिस्थान शेष ज्ञानावरणादि छह कर्मों के प्रकृतिस्थान स्थिति - देशोपशमना और उनके स्वामी अनुभाग और प्रदेश देशोपशमना एवं उनके स्वामी [२६] ३०९ ३१० ३१० ३११ ३१३ ३१४ ३१५ ३१६ ३१८ ३१९
SR No.032438
Book TitleKarm Prakruti Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivsharmsuri, Acharya Nanesh, Devkumar Jain
PublisherGanesh Smruti Granthmala
Publication Year2002
Total Pages522
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size39 MB
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