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________________ १६३ १६४ गाथा - १७ उच्चगोत्र, दुर्भगचतुष्क और तीर्थंकर प्रकृतियों का १६२ उदीरणास्वामित्व गाथा - १८ निद्राद्विक प्रकृतियों का उदीरणास्वामित्व १६२ गाथा स्त्यानर्द्धित्रिक प्रकृतियों का उदीरणास्वामित्व गाथा वेदनीयद्विक, कषायचतुष्क, हास्यषट्क प्रकृतियों का १६३ उदीरणास्वामित्व गाथा - २१ वेदनीयद्विक और सेतर हास्यादिचतुष्क के उदीरणा स्वामित्व की विशेषता गाथा - २२ दर्शनावरण और मोहनीय कर्म के उदीरणास्थानों १६४ की संख्या मिथ्यात्व गुणस्थान में मोहनीय के उदीरणास्थान गाथा - २३ सास्वादन और मिश्र गुणस्थानों में मोहनीय के १६७ उदीरणास्थान अविरत गुणस्थान में मोहनीय के उदीरणास्थान देशविरत गुणस्थान में मोहनीय के उदीरणास्थान प्रमत्त और अप्रमत्त संयत गुणस्थान में मोहनीय के उदीरणास्थान अपूर्वकरण गुणस्थान में मोहनीय के उदीरणास्थान गाथा - २४ अनिवृत्तिकरण गुणस्थान में मोहनीय के उदीरणास्थान १७० सूक्ष्मसंपरायगुणस्थान में मोहनीय के उदीरणास्थान उदीरणा स्थानों की चौबीसियों का संकलन गुणस्थानों में मोहनीयकर्म के उदीरणास्थानों और भांगों की संख्या का प्रारूप गाथा - २५, २६, २७ नामकर्म के उदीरणास्थानों की संख्या १७३ सयोगिकेवली के उदीरणास्थान एकेन्द्रिय के उदीरणास्थान विकलेन्द्रियों के उदीरणास्थान विक्रियालब्धि रहित व सहित तिर्यंच पंचेन्द्रियों के उदीरणास्थान [१८]
SR No.032438
Book TitleKarm Prakruti Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivsharmsuri, Acharya Nanesh, Devkumar Jain
PublisherGanesh Smruti Granthmala
Publication Year2002
Total Pages522
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size39 MB
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