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________________ ४४ भिक्षु वाङ्मय खण्ड - १ २१. आदेज वचन सुभ करम थी, तिणरों वचन मानें सहू कोय हो लाल । जस किती सुभ नाम उदें हूआं, जस कीरत जग में होय हो लाल ।। २२. अगरलधू नाम कर्म सूं, सरीर हलकों भारी नही लगात हो लाल । परघात सुभ नाम उदें थकी, आप जीते पेलों पामें घात हो लाल ।। २३. उसास सुभ नाम उदें थकी, सास उसास सुखे लेवंत हो लाल । आताप सुभ नाम उदें थकी, आप सीतल पेंलो तपंत हो लाल ।। २४. उद्योत सुभ नाम उदें थकी, सरीर नों उजवालो जांण हो लाल । सुभ गइ सुभ नाम कर्म सूं, हंस ज्यूं चोखी चाल वखांण हो लाल । । २५. निरमाण सुभ नाम कर्म सूं, सरीर फोड़ा फूलंगणा रहीत हो लाल । तीर्थंकर नाम कर्म उदे हुआं, तीर्थंकर हुवें तीन लोक वदीत हो लाल ।। २६. केइ जुगलीयादिक तिरयंच नी, गति नें आंणपूर्वी जांण हो लाल । ते तों प्रतक दीसें पुन तणी, ग्यांनी वदें ते परमांण हो लाल । । २७. पेहलो संघेण संठाण वरज नें, च्यार संघेण च्यार संठाण हो लाल । त्यांमें तो भेल दीसे छें पुन तणो, ग्यांनी वदें तो परमांण हो लाल ।। २८. जे जे हाड छें पहिला संघेण में, तिण मांहिला च्यारा माहि हो लाल । त्यांनें जाबक पाप में घालीयां, मिलतों न दीसें न्याय हो लाल ।। २९. जे जे आकार पहिला संठाण में, तिण माहिला च्यारां माहि हो लाल । त्यांनें जाबक पाप में घालीयां, ओ पिण मिलतों न दीसें न्याहि हो लाल ।।
SR No.032415
Book TitleAcharya Bhikshu Tattva Sahitya 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTulsi Ganadhipati, Mahapragya Acharya, Mahashraman Acharya, Sukhlal Muni, Kirtikumar Muni, Shreechan
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year2011
Total Pages364
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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