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गुरुवार
क्यारे प्रभु तुज स्मरणथी आंखो थकी अश्रु सरे, क्यारे प्रभु तुज नामवदता हैयुं मुज गद्गद् बने; क्यारे प्रभु तुज नामश्रवणे देह रोमांचीत बने, क्यारे प्रभु मुज श्वासे श्वासे नाम तारूं संस्मरे ॥
करूणा तणा तुज मानसरमां हंस बनीने हुं रहूं अगणित गुणोना मोती साचा, ते ज हुं निशदिन चरूं, राग जेवा पापना पडछाया पण हुं परिहरूं, प्रभु आपना सानिध्य मां मुज आतमा पावन करूं ॥
मारा जीवनना जीगर वहाला दिलडाना देव तुं, अंतरयामी आ हृदयनो प्राण प्यारो एक तुं, श्वासे श्वासे स्मरण तारूं, रोम रोम भक्तिभरी, तारा प्रेमनी पूजाभरेली, जिंदगी छे माहरी ॥
शुक्रवार
१) श्री ऋषभ प्रभुनुं मुखडुं जोइ मनमयूर नाची उठे, भवोभवतणा पातिक बधा क्षणवारमां दूरे हठे; धन्य धन्य दिवस धन्य धन्य घडी, अमृततणा मेहुला वुठे, श्री नाभिनंदन ऋषभजिनवर आज मुज उपर त्रुठे...
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