SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 39
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ .. श्री चीनस्तयमावली कहाथरे । इ० ॥२॥ आदीन जितशत्रु देशमेरे, जितशत्रु पंचाल कहायरे । जयंत थी चवीने सहुरे, इहां अवतार लहायरे ॥ महाबल जीव तिहां थकीरे, पुन्यवंत प्रधानरे । फागुण सुदि चोथनेरे, चविया जयंत विमानरे। इ०॥४॥प्रभावती ऊर अवतस्यारे, माल हुआ जब लीनरे।डोहलोएहवो ऊपनोरे, पिण पूरचा रहे दीनरे ॥ इ० ५॥जल थल ऊपना फूलडारे, सोवु सेज विछायरे। पंचवर्ण फूलना चंद्रवारे, सुगंध रूप सुहायरे ॥इ०॥ ६ ॥ नवसर हार फूलां लणारे, हुं पहिलं मनरंगरे। वाणव्यन्तरे तिहां देवतारे, पूरे तेह सुरंगरे॥इ०७॥मगसर सुदि इग्यारसेरे, जायोश्रीपुत्रीरत्नरे। अरधा निशी बोल्या पछी रे, माताजी हरखी मनरंगेरे ॥ ८॥ ॥ ढाल ३ तीसरी ॥ .. आदर जीव क्षमा गुण आदर ॥ ए देशी. - छपन कुंवारी आइ तिहां हरखे, जिनबर वंदि पायजी। जन्ममहोत्सव करिये जुमतिसुं,
SR No.032200
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMannalal Mishrilal Chopda
PublisherMannalal Mishrilal Chopda
Publication Year1934
Total Pages160
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size11 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy