SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 16
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ प्राचीन स्तवनावली. ॥ अथ चैत्यवन्दन ॥ (मंगलाचरण) पहेला प्रणमुं प्रथम नाथ, श्री आदिजिनेश्वर । बीजा अजित जिनदेव, वंदु परमेश्वर ॥१॥श्रीसंभव भव संभव, त्रीभवन तारण । अभिनन्दनने समतिनाथ, दोय दोय दुःख निवारण ॥२॥ पद्मप्रभु. श्रीपाससुपास, चंदा प्रभु चन्द्र । प्रह उठाने वांदसुए, नवनिधि होवे जस सेव ॥३॥ विधीसु वांदु सुबुधीनाथ, शीतल सुख दायक । श्रीयांस ने श्री वासुपुज्य, जीवण जगनायक ॥४॥ वंदु विमल अनंत धर्म,एक चित्त चिंतामणी॥श्रीशान्ति करण सहु शान्ति कुंथुअर मल्लिमुक्तामणि ॥५॥ मुनिसुव्रत स्वामी वांदसुए, नमि नेमि कुवार । पार्श्व वीर जिन प्रणमुसुए, जे मुझ हर्ष अपार ॥६॥ त्रीभुवन मांहे जे जिनप्रासाद,शाश्वता अशाश्वता।
SR No.032200
Book TitlePrachin Stavanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMannalal Mishrilal Chopda
PublisherMannalal Mishrilal Chopda
Publication Year1934
Total Pages160
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size11 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy