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________________ , कि उसे जितना पढ़िए उतना ही अानन्द आता है लेकिन इसका रस शान्त । तड़क-भड़क वालेको इसमें 'मजा' नहीं मिल सकता । मृत्युखहोत्सव तो सरलहृदय ही मना सकता और उसका आनन्द भी नही ले सकता है। ज्यों-ज्यों इसका अवगाहन करिए त्यों-त्यों लगता है कि हृदय पूर्ण सचेष्ट होकर बोल रहा है—ाम्भीरतामें सरसता इतनी बड़जाती है कि इसके श्लोक 'नावककेतीर' जैसे मर्मस्थल पर 'गम्भीर घाव'-सा करते प्रतीत होते हैं। . . " पाश्चात्य अँग्रेजी साहित्यमें भी इसी भावधारा की मरण-विषयक रचनाएँ प्रणीत हुई हैं। सुप्रसिद्ध अंग्रेजी कवि नाट्यकार शैक्शपियरने कहा कि सन्तप्त जीवनके बुखारके पश्चात् मनुष्य सुखसे सोता है: . After life's fitful fever he sleeps well,' । अर्थात् मृत्यु सुख का कारण है। 'मेजर फार मेजर' नाटकमें भी शैक्शपियरने दिखाया कि संसारी जीवन बड़ा ही संत्रस्त है, अतः इससे मुक्तिके लिए मृत्युका भय नहीं होना चाहिए:. •The wearest and most loathed worldly life That age, ache, penury and. imprisonment, Can lay on nature, is paradise , .. To-what we fear of death' ' पोइंटलौरियेट टेनीसन (Poet laureate Tennyson) जन सुविख्यात कवि हो गए तो उन्होंने ८१ वर्षकी अवस्थामें एक संक्षिप्त गेय कविता .'क्राँसिङ्ग, दी बार' (Crossing the Bar) रची, जो अंग्रेजी साहित्यमें विशेषकर लोकप्रिय है। "क्रॉसिङ्ग दी बार' सरणके लिए लाक्षणिक प्रयोग है। - उपयुक्त कविताकी निम्न अन्तिम पंक्तियाँ दृष्टन्य हैं *Twi-light and evening beli, :: And after' that the dark ! (आ)
SR No.032175
Book TitleMrutyu Mahotsav
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSadasukh Das, Virendra Prasad Jain
PublisherAkhil Vishva Jain Mission
Publication Year1958
Total Pages48
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size8 MB
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