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________________ अवसर बेर-बेर नहीं प्रावे । ज्यु जाने त्यु कर ले भलाई, जनम-जनम सुख पावे । अवसर०। तन धन योवन सब ही झठा, प्रारण पलक में जावे । अवसर० । तन छूटे धन कौन काम को, कांहेकुकृपण कहावे । अवसर०। जाके दिल में सांच बसत है, ताको झूठ न भावे । अवसर० । प्रानन्दघन कहे चलत पंथ में, समर समर गुण गावे । अवसर०। मुमुक्षु दीपक, खोया हुआ धन पुनः प्राप्त हो सकता है, खोया हुआ स्वास्थ्य पुनः प्राप्त हो सकता है, परन्तु खोया हुआ समय पुनः प्राप्त नहीं हो सकता है। If you have lost your money, you can get it back, If you have lost your bealth you can get it back. But if you have lost your time you can't get it back at any cost. ज्यादा क्या लिखू? तुम स्वयं समझदार हो। याद करो प्रभु महावीर के उस वाक्य को-'समयं गोयम! मा पमायए' हे गौतम ! समय मात्र का भी तू प्रमाद मत करना । सचमुच, भगवान महावीर के इस उपदेश को जीवन में आत्मसात् करने की आवश्यकता है। बाह्य दुनिया अब बहुत देख ली है, अब अन्तरंग दुनिया के दर्शन करो आत्मा के स्वरूप-चिंतन में डूबो, फिर देखो कैसे आनन्द मिलता है। परिवार में सभी को धर्मलाभ । शेष शुभ। -रत्नसेनविजय मृत्यु की मंगल यात्रा-78
SR No.032173
Book TitleMrutyu Ki Mangal Yatra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatnasenvijay
PublisherSwadhyay Sangh
Publication Year1988
Total Pages176
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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