SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 7
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ भवियां। ए आंकडी ॥ प्रभुरत्नसूरि गुणवंता जिनगुण पाया ना अंतारे भवियां ॥ सद्गुरु० ॥ १ ॥ प्रभुरत्नसूरि सुखकारी, सबजीवनके उपकारीरे भवियां। सद्गुरु० ॥२॥ प्रभुरत्नसूरि नितपूजे,पापसन्ताप सु ध्रुजैरे भवियां। सद्गुरु० ॥३॥ प्रभुरत्नसूरि सुख दाया, गढ ओएश सुं आयारे भवियां। सद्गुरु० ॥ ४॥ प्रभुरत्नसूरि उपदेश सुनावै । पद्मा-अम्ब-सिद्धादिका आवेरे भवियां । सद्गुरु०॥५॥ प्रभु मास संलेखना लींनी । साचलने विनती कीनीरे भवियां सद्गुरु० ॥ ६ ॥ प्रभु मास चोमासे ठहरो । लाभ हुवै अति गहरोरे भवियां । सद्गुरु० ॥ ७॥ प्रभु उहडपुत्र जीवायो । नगर भेलो हुय आयोरे भवियां। सद्गुरु० ॥८॥ प्रभुसेवै उपलदे राजा । मनका संशय भाजारे भवियां । सद्गुरु० ॥९॥ प्रभु बारे व्रत उचरावे। नगरी सब श्रावक कहलावैरे भवियां । सद्गुरु० ॥ १०॥ प्रनु ओएश वंश स्थाप्यो । मिथ्या तम जडसें काप्योरे भवियां । सद्गुरु० ॥१॥ प्रभु चरन शरनकी आशा । यो शुभकरण सुवासारे भवियां । सद्गुरु ॥ १२॥ काव्य. शुभस्वर्धनीवारिपुण्यप्रवाह प्रमृष्टे प्रकृष्टे सदा लोकजुष्टे ।
SR No.032023
Book TitleBruhat Puja Aur Laghu Puja
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTribhuvandas Amarchand Salot
PublisherJograjji Chandmallji Vaid
Publication Year1916
Total Pages28
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size4 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy