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________________ ( १५०) ज्यारे नपशम समकित वा कयोपशम समकित पामशे त्यारे प्रणाम मिथ्यात्व टलशे, माटे ज्ञानमां तथा ज्ञानी पुरुषनी नपासनामां तत्पर रहेQ, ने ज्ञानीनां वचन प्रमाणे चालवानी अति नत्कंग राखवी, देवगुरुनु अतीशे आराधन करवू, तेथी ए मिथ्यात्व दूर थशे. हवे ए मिथ्यात्व दूर थयु ले के नहीं तेनी परीक्षा समकितना लक्षण समकितनी सज्जायमां जशविजयजी म. हाराजे कयां ते प्रमाणे पोतानामां के नहीं ते मेलवी जोवाश्रीजगाशे,अने अनुमानथी धारी शकाशे;निश्चय तो अतिशय झानीनां वचनश्री थाय, ते तो आ कालमा विरह एटले नपाय नथी; तेम अतिशय ज्ञानीने पुण्या विना निरधार न थाय तेनो दाखलो जे इशान इं५ महाराजे पण नगवान्ने प्रश्न पुग्या के हुँनवी के अन्नवी बुं ? समकिती के मिथ्यात्वी बुं? आवा त्रण ज्ञानना धणीथी मुकरर थयुं नही तेथी पुर्बु थयुं, तो आपणे शुं मुकरर करी शकीए. तो पण शास्त्राधारे नद्यम करवो, मार्गानुसारीना गुण हरिनासूरि महाराजे धर्म बिंडमां बताव्या ने तेनी साथे मिलान करवू अने मिलान करतां लक्षण न मले तो मिथ्यात्व गयुं नथी एम समजवू. प्रदेश मिथ्यात्व ते मिथ्यात्वनां दलीयां आत्म प्रदेश साये कीर नीरनी परे एकमेक श्रश्ने रह्यां ने ते ज्यारे कायक समकित थाय ने त्यारे टले . मिथ्यात्व बंध नदय ने सत्तात्रणे प्रकारे टली जाय त्यारे कायक समकित थाय , माटे ते समकित प्रगट करवानो नाव राखवो के प्रदेश मिथ्यात्व टली जाय. आ बधां मलीने पचीश प्रकारना मिथ्यात्व शास्त्रोमां दरशाव्यां . एमां केटलाएक नेद एक बीजाने मलता , तेनुं कारण एटलुंज समजवू के साची वस्तुने खोटी कहेवी ए मि
SR No.023346
Book TitleAdhar Dushan Nivarak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnopchand Malukchand Sheth
PublisherAnopchand Malukchand Sheth
Publication Year1903
Total Pages232
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size18 MB
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