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________________ प्रकारे,पर्याप्ता तथा अपर्याप्ता एमनु शरीर अंगुलनाअसंख्यातमा नागर्नु . आयुष्य अंतर्मुहूर्तY. हवे सूक्ष्म निगोद ते घनदराज लोकमां सर्व ठेकाणे नरेली , सूक्ष्म निगोद विनानी को जगो खाली नश्री. एनी सूक्ष्मता एवी के अंगुलना असंख्यातमा नागमां निगोदना असंख्याता गोला , तेमांना एक गोलामा असंख्याती निगोद ठे, ते एक निगोदमां अनंता जीव ठे, ते जीवोनुं आयुष्य एक श्वास लश्ने मुकीए तेटलामां सत्तर जव माजेरा श्राय, एटले एटली वार मरवु नपजq याय, ए जीव पण पर्याप्ता अने अपर्याप्ता बे प्रकारे . ए बे नेद प्रत्येकना, बे नेद वादर निगोदना, बे नेद सूक्ष्म निगोदना-ए त्रराना मली वनस्पतिना जीवनाउनेद थया. - बेज्ञ जीव ते शंख, कोमा, गंमोखा, अलसीयां, मेहेर, कर्मीया, शर्मीया, आदे जेने शरीर ते फरस इंडि तथा मुख ते रस इंहिए बे इंडिले ते बे इंदि जीव जाणवा. ए पण पर्याप्ता अने अपर्याप्ता बेनेदे . ए जीवन शरीर मोटामां मोटुं बार जोजन- होय, एवा शरीरवाला जीव विशेषे करीने चोथा प्रारामां थाय , ते कालमां मनुष्यनुं शरीर पण मोटुं होय , केटलाएक जीवने लगवंतना वचननी प्रतीत नथी होती. तेने व्यामोह पाय ठे के पाटलुं मोटुं शरीर केम होय.पण बुभिवानने तथा नगवंतना वचननी अज्ञवालाने शंका थती नथी.कारण जे हालमां एक पेपरमां वांचवामां आवेतुं हतुं के एक गीलोमीनी हामकां सवा गजनां हता, ने देखीती तो हालमां चार तसुनी देखाय . हामका पाटलां मोटां देखाय . कोई काले एवी मोटी पण यती नीचे थाय ले तेम हालमां देश फेरथी पस मोटा नानानो फेर देखाय . काकरेजी बलदीया जेवा मोटा याय ने तेवा मोटा बलदीया श्रा देशमां थता नथी. घोमा वि.
SR No.023346
Book TitleAdhar Dushan Nivarak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnopchand Malukchand Sheth
PublisherAnopchand Malukchand Sheth
Publication Year1903
Total Pages232
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size18 MB
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