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________________ Ph. D. REPORT OF SADHVI MUKTIPRABHA Title of Thesis जैन दर्शन में : एक समालोचनात्मक अध्ययन Report साध्वी मुक्ति प्रभा द्वारा पी-एच. डी. उपाधि हेतु प्रस्तुत जैन दर्शन में योग : एक समालोचनात्मक अध्ययन नामक शोध प्रबन्ध एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। ७३९ पृष्ठों का यह वृहत ग्रन्थ जैन योग के विविध पक्षों का विस्तार पूर्वक अध्ययन करता है। यह शोध ग्रन्थ बारह अध्यायों में विभक्त है। प्रथम अध्याय में योग का अर्थ, उसका विकास, उसकी प्राप्ति के परम उपाय आदि पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे अध्याय में विभिन्न दृष्टियों से योग का विश्लेषण किया गया है। तीसरे अध्याय में योग और वीर्य, योग और समाधि, योग और ब्रह्मचर्य, योग और बन्ध, अनुष्ठान आदि पर पर्याप्त प्रकाश डाला गया है। चौथे अध्याय में जैन योग का स्वरूप विश्लेषण करते हुए विदुषी लेखिका ने संवरयोग, आवश्यक योग, ज्ञान योग, कर्मयोग, भक्तियोग, आज्ञायोग आदि का विश्लेषण तथा विधिवत निरुपण किया है। आत्मा का विकास क्रम शीर्षक पांचवे अध्याय में लेखिका ने बहिरात्मा, अंतरात्मा तथा परमात्मा के स्वरूप आदि का मार्मिक विश्लेषण तथा अध्ययन किया है। छठे अध्याय में गुणस्थान के अर्थ तथा विभिन्न गुणस्थानों का विस्तारपूर्वक आधिकारिक विवेचन हुआ है। सातवें अध्याय में योग, भावना योग, ध्यान योग आदि का गंभीर तथा विशद विवेचन किया गया है। आठवें, नवें तथा दसवें अध्यायों में योग दृष्टियों से अयोग दर्शन, योगविंशिका में योग स्वरूप तथा उपाध्याय यशोविजय जी की दृष्टि से जैन योग का महत्व का क्रमशः वैदुष्यपूर्ण तथा विस्तृत अध्ययन प्राप्त होता है । ग्यारहवें अध्याय में विविध जैन योग शक्तियों की विशेषता में जय योग, मंत्र योग, कुंडलिनी योग, षट चक्र, गुरूकृपा आदि पर महत्त्वपूर्ण प्रकाश डाला गया है । बारहवां अध्याय जैन योग के महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों पर विस्तार से प्रकाश डालता है अन्त में एक विस्तृत ग्रन्थ सूची एवं महत्वपूर्ण चित्र दिये गये हैं। प्रस्तुत शोध प्रबन्ध से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि साध्वी लेखिका ने जैन योग से सम्बन्धित विपुल साहित्य का मनोयोगपूर्वक अध्ययन किया है। योग के स्वरूप, उसके उद्देश्य आदि के विषय में लेखिका की दृष्टि सूक्ष्म तथा गंभीर है। लेखन की शैली तथा स्तर पर्याप्त संतोषजनक है । प्रस्तुत शोध प्रबन्ध विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पी-एच. डी. उपाधि से सम्बन्धित नियमों का संपूर्ण रूप से पूरा करता
SR No.023147
Book TitleYog Prayog Ayog
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuktiprabhashreeji
PublisherPrakrit Bharti Academy
Publication Year1993
Total Pages314
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size20 MB
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