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________________ २१५ जीवाजीवविभत्ती अलोए पsिहया सिद्धा लोयग्गे य पइट्टिया । इहं बोदि चरत्ताणं तत्थ गन्तूण सिज्झई ॥ ५६ ॥ बारसहिं जोयणेहिं सव्वट्टस्सुवरिं भवे । ईसीपमारनामा उ पुढवी छत्तसंठिया ॥ ५७ ॥ पणयालसयसहस्सा जोयणाणं तु आयया । तावइयं चैव वित्थिण्णा तिगुणो साहियपरिरओ ॥ ५८ ॥ अट्ठजोयणबाहुल्ला सा मज्झम्मि वियाहिया । परिहायन्ती चरिमन्ते मच्छियपत्ताओ तणुयरी ॥ ५९ ॥ अज्जुणसुवण्णगमई सा पुढवी निम्मला सहावेणं । उत्ताणगछत्तगसंठिया य भणिया जिणवरेहिं ॥ ६० ॥ संखंक कुन्दसंकासा पण्डुरा निम्मला सुहा । सीयाए जोयणे तत्तो लोयन्तो उ वियाहिओ ॥ ६१ ॥ जोयणस्स उ जो तत्थ कोसो उवरिमो भवे । तस्स कोसस्स छब्भाए सिद्धाणोगाहणा भवे ॥ ६२ ॥ तत्थ सिद्धा महाभागा लोगग्गम्मि पट्टिया । मवप्पवंचओ मुक्का सिद्धिं वरगई गया ॥ ६३ ॥ उस्सेहो जस्स जो होइ भवम्मि चरिमम्मि उ । तिभागहीणा तत्तो य सिद्धाणोमाहणा भवे ॥ ६४ ॥ एगत्तेण साईया अपज्जवसिया विय । : पुहत्तेण अणाईया अफज्जवसिया वि य ॥ ६५ ॥ अरूविणो जीवघणा नाणदंसणसन्निया । अउलं सुहं संपत्ता उवमा जस्स नत्थि उ ॥ ६६ ॥ लोगेगदेसे ते सब्वे नाणदंसणसन्निया । संसारपारनित्थिण्णा सिद्धिं वरगई गया ॥ ६७ ॥ संसारत्था उ जे जीवा दुविहा ते वियाहिया । तसा य थावरा चैव थावरा तिविहा तहिं ॥ ६८ ॥ पुढवी आउजीवा य तहेव य वणस्सई । इच्चेए थावरा तिंविहा तेसिं भेए सुणेह मे ॥ ६९ ॥ [ - ३६.७० दुविहा पुढवीजीवा सुहुमा बायरा तहा । पज्जत्तमपज्जत्ता एवमेए दुहा पुणो ॥ ७० ॥
SR No.022572
Book TitleUttaradhyayan Sutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorR D Wadekar, N V Vaidya
PublisherFergussion College
Publication Year1954
Total Pages132
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_uttaradhyayan
File Size10 MB
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