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________________ [१४१] ॥ खट बे मासी खादर्या, अट्टम एक तपकार ॥ २ ॥ खटमासी एक तिम कर्यो ए, पण दिए ऊणा खटमास || वासे योगणत्रीसठ जला, दीक्षा दीन एक खास || ३ || जद्र प्रतिमा दोय तणीए, महाभद्र दीन चार, दस दीन स्वारथा ने, लागट निरधार ॥ ४ ॥ वणपाणि तप आदर्या, पारणा दीनजास ॥ द्रव आहार पारणा कर्या, त्रण से योगणपचास ॥ ५ ॥ छद्मस्थ एणीपरे रह्या ए, सह्या परीसह अघोर ॥ सुकल ध्यान अलंकरी, बाल्यां कर्म कठोर ॥ ॥ ६ ॥ सुकल ध्यान अंतर रह्याए, पाम्या केवल ज्ञान, पद्म कड़े मुक्ते गया, नमतां नित्य कल्याण ॥ ७ ॥ इति संपूर्ण ॥ ४ ॥ ॥ चैत्यवंदन पांचमुं ॥ ज्ञान उज्वल दीवा करो, मेरैया सज्झाया ॥ तप जप सेव सुवाणिया, अध्यातक (म) थाय ॥ १ ॥ सुध आहार सुध जक्षिका, सत्यवचन तंबोला ॥ सीयल आभूषण पेद्देरीये, क
SR No.022371
Book TitlePrakaran Ratna
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagardas Pragjibhai
PublisherNagardas Pragjibhai
Publication Year1932
Total Pages230
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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