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________________ २८८ नवतत्त्वसंग्रहः | c अव उ० १६ योग | मन आदि ३ | मन आदि मनो० वचन० ३, सयोगी कामयोगी वा अयोगी १७ उपयोग साकार १, व । म् । → अनाकार २ १८ कषाय | क्रोध आदि ४ ४।३।२।१ | उपांशत, क्षीण | क्षीणक० १९ लेश्या ३ प्रशस्त १ शुक्ल | १, वा प्रशस्त प्रशस्त अलेश्यी २० परिणाम | वर्धमान, हीन, | वर्धमान, हीन, वर्धमान, हीन, वर्धमान, हीन, वर्धमान, निर्ग्रन्थ अवस्थित अवस्थित । अवस्थित | अवस्थित अवस्थित वत् वर्धमान ज०१ वर्धमान | वर्धमान समय, उ० ज० उ० अंत- ज० उ० अंतर्मुहूर्त, मुहूर्त, अव- | अंतर्मुहूर्त, हीयमान स्थित ज० ज० १ १ समय, स्थित समय, उ० ज० अंतअंतर्मुहूर्त, अंत- मुहूर्त, अवस्थित ज० र्मुहूर्त उ० देश १ समय, ऊन पूर्व उ० ७ समय, कोटि २१बंध ७ बांधे ७वा८ | ७ वा ८ | ८ वा ७ | १ साता | १ बंधे वा आयु नहीं वा६ अबंधक २२ वेद | ८ कर्म ८ । ७ मो० वर्जा ४ २३ उदीरणा ६ आयु ७८६ । ७८६ ८७६५ ५ वा २ | उदीरे २, १ वेदनीय ? २ वर्जी दीरक २४ उव- | पुलाकपणा | प्रतिसेवना १, | प्रतिसेवना- | कषायकुशी- निर्ग्रन्थपणा | स्नातकसंपज | छांडी कषाय- | कषायकुशील | पणा छोडी | लपणा छोडी छोडी हण्ण कुशील १, २, असंयम ३, बकुश १, | पुलाक १, कषाय- छोडी असंयम २, ए | देशविरति ४, | कषायकुशील | बकुश २, | कुशील १, सिद्ध२ प्रति आदरे. | एवं ४ आदरे, | २, असंयम | प्रतिसेवना ३, स्नातक २, गति बकुशपणा | ३ देशविरति| निर्ग्रन्थ ४, | असंयम ३, आदरे छोडी | ४, ए ४ | असंयम ५, आदरे देशविरति ६, पडिवजे ए ६ पडिवजे वा अनु पणा
SR No.022331
Book TitleNavtattva Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijayanandsuri, Sanyamkirtivijay
PublisherSamyagyan Pracharak Samiti
Publication Year2013
Total Pages546
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari & Book_Gujarati
File Size14 MB
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