________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir 32 तामानियुतऽपत्य॑मानकुविकविमियक्षसिप्पयज्यो 55 इन्द्र वायूऽइमे // सुताऽउपुप्प्रोभिरागतम् // इन्दवोवामुशन्तिहि 56] मित्राहुवे // पूतदक्षंबरुणञ्चरिशादसम् // धियङ्घताची साधन्ता ५७दस्रायुवाकवासुतानासत्याबुक्तर्हिषः॥औयातरुद्रवर्तनी॥ तम्प्रत्नथायवेन:५८विदद्यदि॥ विदादीसुरमारुगणमद्रुम्महिपाथः / पूर्व्यसुध्यक्तः ॥अग्यनयत्सुपाक्षराणामारवम्प्रथमाजानुतीगा त् 59 नहिस्प्पर्शम् // नहिस्प्पशुमविदन्नन्न्यमुम्माद्वैश्वानरात्रं रएतारमने // एमैनमवृधन्नमृताऽअमत्र्यवैश्वानरलैवजित्यायदे वा 60 उग्याविधुनिना // उग्याबिघुनिनामृधइन्द्राग्नीहवामहे // For Private and Personal Use Only