________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ( 1006 ) कृशता,-जः 1. रोग 2. काम, प्रणयोन्माद 3. काम- | शर्करिक (वि.) (स्त्री०-को) शर्करिल (वि.) [शर्करा देव 4. पुत्र, सन्तान-कि० ४।३१,—तुल्य (वि.) / +ठक, इलच वा] कंकरीला, बजरीदार, किरकिरा / समान अर्थात् उतना प्रिय जितना अपना शरीर, दण्डः शर्करी (स्त्री०) 1. नदी 2. करधनी, मेखला। 1. शारीरिक दंड 2. कार्य-साधना (जैसा की तपस्या शर्धः [ शृथ्+घञ ] 1. अपानवायु का त्याग, अफारा में),-धूक (वि.) शरीरधारी, पतनम्, पातः (इस अर्थ में नपुं० भी होता है) 2. दल, समूह मृत्य, मौत,-पाकः (शरीर की) कृशता,---बद्ध 3. सामर्थ्य, शक्ति। (वि.) शरीर से युक्त, शरीरधारी, शरीरी-कु. शर्वजह (वि०) [ शर्ध+हा खिश्, मुम् ] अफारा उत्पन्न 5 / 30, -बन्धः 1. शारीरिक ढांचा रघु० 16023 | करने वाला,-हः उड़द या माष की दाल / 2. शरीर से युक्त होना अर्थात् शरीरधारी प्राणी का शर्धनम् [ शव-+ ल्युट ] अपानवायु को छोडने की क्रिया / जन्म-रघु०१३।५८,-बन्धकः सशरीर प्रतिभू,-भाज शर्ब (भ्वा० पर० शर्बति) 1. जाना, हिलना-जुलना (वि.) शरीरधारी, शरीरी (पुं०) जन्तु, शरीरधारी 2. क्षतिग्रस्त करना, मार डालना। प्राणी,-भेवः (आत्मा से) शरीर का वियोग, मृत्यु, शर्मन (पं.) श+मनिन / ब्राह्मण के नाम के आगे --.-यष्टिः (स्त्री०) पतला शरीर, सुकूमार, दुबला- जोड़ी जाने वाली उपाधि यथा विष्णुशर्मन, तु० पतला,...-यात्रा आजीविका, ---विमोक्षणम् आत्मा का वर्मन्, दास, गुप्त (नपुं०) 1. प्रसन्नता, आनन्द, खुशी शरीर से छुटकारा, मुक्ति, - वृत्तिः (स्त्री०) शरीर --त्यजन्त्यसुशर्म व मानिनो वरं त्यजन्ति न त्वेकमका पालनपोषण-रघु० २१४५,-वैकल्यम् शारीरिक याचितं ब्रतम्--नै० 1150, रघु० 1169, भर्त० रोग, बीमारी, व्याधि,-शुश्रूषा व्यक्तिगत सेवा, 3 / 97 2. आशीर्वाद 3. घर, आधार (इस अर्थ में --संस्कारः 1. व्यक्ति की सजावट 2. नाना प्रकार बहुधा वैदिक)। सम० द (वि.) आनन्ददायक के शुद्धिसंस्कारों के अनुष्ठान द्वारा शरीर को निर्मल (-वः) विष्णु का विशेषण / करना,-संपत्तिः (स्त्री०) शरीर की समृद्धि, (अच्छा) | शर्मरः [शर्मन्-रा+क] एक प्रकार का परिधान, स्वास्थ्य, पावः शरीर की दुर्बलता, कृशता-रघु० वस्त्र / 3 / 2, -स्थितिः (स्त्री०) 1. शरीर का पालन-पोषण शर्या [ श+यत्+टाप् ] 1. रात्रि 2. अंगली। -रघु० 5 / 9 2. भोजन करना, खाना (का० में बहुधा शर्व (म्वा० पर० शर्वति) 1. जाना 2. चोट पहुँचाना, प्रयुक्त)। ___ क्षति पहुँचाना, मार डालना। शरीरकम् [शरीर+कन्] 1. देह 2. छोटा शरीर,-कः शर्वः [+व] 1. शिव-रधु० 11 / 93, कु. 6 / 14 आत्मा। 2. विष्णु। शरोरिन (वि०) (स्त्री०-णी) [शरीर+इनिशरीर- शर्वरः शि---प्वरच ] कामदेव, रम अन्धकार / धारी, शरीरयुक्त, शरीरी-करुणस्य मूतिरथवा ! -करुणस्य मूतिरथवा शर्वरी [शु+वनिप, डीप, वनोर च] 1. रात शशिनं शरीरिणी विरहन्पयेव वनमेति जानकी --उत्तर० पुनरेति शर्वरी रघु० 8153, 312, 1093, शि. 3 / 4, मालवि० 110 2. जीवित (पुं०) 1. कोई भी 1115 2. हल्दी 3. स्त्री। सम-ईशः चन्द्रमा / शरीरधारी वस्तु (चाहे जड़ हा चाहे चेतन) शरी- शर्वाणी [ शर्व+ङीष, आनुक ] शिव की पत्नी पार्वती। रिणा स्थावरजंगमानां सुखाय तज्जन्मदिनं बभूव-कु० शर्शरीक (वि०) [+ईकन्, द्वित्वादि ] उपद्रवी, क्रूर, श२३, रघु० 8 / 43 2. सजीव प्राणी 3. मनुष्य __ ----कः धूर्त, पाजी, दुर्जन / आत्मा (शरीर से युक्त)--रघु० 8189, भग० शल (भ्वा० आ० शलते) 1. हिलाना, हरकत देना, 2 / 18 / शर्करजा [शु+करन्+जन् +3+टाप्] कवयुक्त चीनी, ii (म्वा० पर० शलति) 1. जाना 2. तेज़ दौड़ना। मिश्री। ii: (चुरा० आ० शालयते) प्रशंसा करना। शर्करा श+कर+टाप्] 1. कंदयुक्त चीनी 2. कंकड़ी, / शल: [ शल+अच् ] 1. सांग, बी 2. मेख 3. भुंगी नाम रोड़ी, बजरी मच्छ० 5 3. फकरीला रूप 4. बालू का शिव का एक गण 4. ब्रह्मा, लम् साही का कांटा से युक्त भूमि, रेत 5. टुकड़ा, खण्ड 6.ठींकरा, (कुछ के अनुसार पुं० भी)। 7. कोई भी कड़ा कण जसा कि 'जलशर्करा', पानी शलकः[ शल+कन् ] मक्कड़, मकड़ा / का कण अर्थात् ओला 8. पथरी का रोग / सम. शलम: [शल+अङ्गच ] राजा, प्रभु / --उदकम खांडमिश्रित जल, चीनी डाल कर मीठा शलभः[शल+अभच ] 1. टिड्डा, टिही-श० 1232 किया हुवा पानी,-- सप्तमी वैशाख शुक्ला सप्तमी के 2. पतंगा-..कौरव्यवंशदावेऽस्मिन् क एष शलभायते दिन मनाया जाने वाला अनुष्ठान। . -वेणी. 219, शि० 21117, कु. 4 / 40 / मानां सुखाय नाव प्राणी 3. मन शल् (भ्वा० अ. दापना / / जाना 2. तेज दौड़ना For Private and Personal Use Only