SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 6
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir द्वारं OS श्रीयशोदे सा पुण सहहणे जाणणे य विणएऽणुभासणे तह य । अणुपालगम्मि भावे छव्विहसुद्धी मुणेयव्वा ॥ २४ ॥ विशुद्धिद्वाज बीये पच्चक्वाणवियारं सयलं सद्दहइ तह य जो मुणइ । तस्स उ पच्चग्वाणं सहहणाजाणणासुद्धं ॥ २५॥ जं काउं सूत्रविचार प्रत्याख्यान किइकम्मं दरोणओ पंजलीऽभिमुहवयणो । गिण्हइ पच्चक्खाणं तं भण्णइ विणयसुद्धं तु ॥ २६ ॥ अणुभासइ स्वरूप. गुरुवयणं अक्खरपयवंजणेहिं परिसुद्धं । गुरुसद्दलहुयसद्दो तं जाणऽणुभासणासुद्धं ॥ २७ ।। पच्चक्वइ वोसिरई जाएयं नवरं गुरू समुच्चरइ । सीसो पच्चक्वामित्ति वोसिरामित्ति भासेइ ॥ २८॥ तथा-पच्चरवाया सूरी ॥३ ॥ लिपंचविहायारधारगो गीओ । सीसं पडुच्च जम्हा आहारनिसेहणं कुणइ ॥ २९ ॥ पच्चक्खाविंतो पुण सीसो समुवडिओ सयं चेव । नियगाहारनिसेहे पउंजई गुरुजणं जेण । दा ॥ ३० ॥ अणुपालणाविसुद्धं आवइपत्तोऽवि जमणुपालेइ । सम्मं अचलियचित्तो तयय उवओगओ चेव । दा ॥३१॥ जं नो कोहा माणा माया लोभा भया व सोगा वा । नो जसकित्तिनिमित्तं नो पूयागारवनिमित्तं ॥ ३२॥ इहपरलोगासंसारहिओ जं कुणइ निज्जराहेउं । इंदियवियारविरओ भावविसुद्धं तयं नेयं ।। ३३ ॥ जं पुण कोहाइवसा उम्मत्तो वावि सुमिणमज्झे वा। गिण्हइ | पच्चक्खाणं तं न पमाणं सुयहराणं ॥ ३४ ॥ अन्नं मणमिकाउं अन्न वायाए कुगइज सहसा । तत्थवि मणं *पमाणं न पमाणं वंजणच्छलणा ।। ३५ । इय सुद्धीहि विसुद्धं पच्चवाणं भगति मोक्वंग । एयाहि अपरिसुद्धं ॥३॥ का विवरीयं तं मुणेयव्वं । ३६ ॥ भणियं विद्धिदारं सतविधारंति संपयं भणिमो । नवकार माइयाणं कमेण मुत्ताणुसारेणं ।। ३७ ।। दा. २ । 94 For Private and Personal Use Only
SR No.020579
Book TitlePratyakhyan Swarupam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
PublisherRushabhdev Keshrimal Jain Shwetambar Sanstha Ratlam
Publication Year1927
Total Pages120
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy