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शुद्धि-शूक जहाँ वास्तविक उपमेयका निषेध करके उपमानकी स्थापना शुभ्रता-स्त्री० [सं०] उज्ज्वलता, सफेदी; दीप्ति । की जाय।
शुभ्रांशु-पु० [सं०] चंद्रमा कपूर । शुद्धि-स्त्री० [सं०] शुद्ध करनेकी क्रिया, मार्जन; पवित्रता; शुमार-पु० [फा०] भय; गिनती, लेखा । मु०-में न सफाई; बुरा कर्म करने, दूसरे धर्म में परिवर्तित होने आदि- रहना,-मन होना-बेशुमार, संख्यातीत होना। -में के कारण अपवित्र हुए व्यक्तिको शुद्ध करते समयका | न लाना-कुछ न समझना, नितांत उपेक्षणीय मानना। संस्कार (वैदिक धर्म)।-पत्र-पु० वह पत्र, सूची, जिसमें शुमाली-वि० [अ०] उत्तरका, उत्तरी । -अमरीका-पु० (प्रायः) शब्द वा अर्थ शुद्ध करके रखे गये हों; शुद्धिके | उत्तरी अमरीका। पश्चात् धर्मशास्त्रश पंडितों द्वारा शुद्धि वा प्रायश्चित्तके | शरुआत-स्त्री० 'शुरु'का बहु० (हिंदीमें एकवचनमें प्रमाणरूप दिया गया व्यवस्थापत्र ।
प्रयुक्त) आरंभ। शुद्धोदन-पु० [सं०] बुद्धके पिता जिनके राज्यकी राज- शुरू-पु० [अ० 'शुरुअ'] आरंभ उठान । धानी कपिलवस्तु थी।
शुल्क-पु० [सं०] कर, महसूल जो राज्य द्वारा घाट, शुद्धाशुद्धि-स्त्री० [सं०] शुद्ध और अशुद्धका भाव । मार्ग आदिपर लिया जाता है। आवेदनपत्र देने, पढ़ने शुन-पु० [सं०] कुत्ता।
आदिका कर, फीस ( जैसे-प्रवेशशुल्क आदि ); कन्याके शुनक-पु० [सं०] कुत्ता; कुत्तेका पिल्ला ।
माता-पिता द्वारा वरके माता-पितासे अथवा स्वयं वरसे शुनाशीर, शुनासीर-पु० [सं०] इंद्रा उल्लू ।
कन्या देनेके बदले लिया हुआ द्रव्य; दहेज; स्त्री-धनका शुनी-स्त्री० [सं०] कुक्कुरी, कुतिया; कुष्मांडी।
भेद (जैस-भगिनीशुल्क); संभोगके बदले दिया गया शुनीर-पु० [सं०] कुक्कुरीसमूह, कुतियोंका झुंट। द्रव्य ग्राह्य धन ।-ग्राहक-ग्राही(हिन्)-पु० शुल्क शुबहा-पु० [अ०] भ्रम, धोखा, संदेह ।
एकत्र करनेवाला ।-द-पु०विवाहके लिए शुल्क देनेवाला। शुभंकर-वि० [सं०] मंगलकारी, कल्याणकर ।
शुल्काध्यक्ष-पु० [सं०] चुंगीका अध्यक्ष । शुभंकरी-वि०स्त्री० [सं०] मंगलकारिणी । स्त्री०पार्वती,दुर्गा। शुल्काई-वि० [सं०] (ड्यूटिएबिल) शुल्क या कर बैठाये शुभ-वि० [सं०] मंगलमय, कल्याणकर, सुखद अनुकूल जाने योग्य,जो उन वस्तुओंकी सूचीके अंतर्गत हो जिनपर अच्छा । पु० मंगल, कल्याण, सुख ।-कर-वि० कल्याण- शुल्क ग्रहण करनेका निश्चय हुआ हो। कारी, मंगलकारक । -करी-वि० स्त्री० मंगलकारिणी। शुश्रपक-वि० [सं०] सेवा-कार्य करनेवाला, खिदमतगार; स्त्री० पार्वती।-कर्मा (मन)-वि० अच्छा कर्म करने- आज्ञाकारी । पु० नौकर, दास । वाला । -ग-वि० सुंदर; भाग्यवान् । -ग्रह-पु० शुश्रषा-स्त्री० [सं०] सेवा-टहल; (बच्चेका) पालन-पोषण; मंगलकारी, अनुकूल ग्रह-गुरु, शुक्र आदि । -चिंतक- खिदमतगारी स्वास्थ्यकी देखरेख, परिचर्या कथन सुननेवि०किसीकी भलाई चाहनेवाला, हितैषी ।-दंती-स्त्री० की इच्छा । -प्रणाली-स्त्रो० रोगीकी यथोचित सेवाका सुंदर दाँतोंवाली स्त्री। -दर्शन-वि० सुंदर; जिसके । ढंग, नियम। दर्शनसे मंगल हो, जिसका मुँह देखनेसे शुभ शकुन हो। शुष्क-वि० [सं०] सूखा, अनार्द्र, जिसमें गीलापन न -दायी (यिन्)-वि० मंगलप्रद, शुभद । -लग्न-पु० हो शीर्ण, नीरस, कठिन, दिमागको थकानेवाला (जैसेशुभ मुहूर्त, मंगल-घड़ी। -शंसी (सिन्)-वि० मंगल- शुष्क कार्य); समाजके सुख-दुःखपर ध्यान न रखनेवाला, कथन करनेवाला, मंगलकी सूचना देनेवाला ।-सूचक- हृदयहीन (जैसे-शुष्क व्यक्ति); निष्प्रयोजन, निस्सार । वि० मंगलकी सूचना देनेवाला । -सूचन-पु०,-सूचना- -वृक्ष-पु० धव वृक्ष । -व्रण-पु. वह घाव जो सूख स्त्री० मंगलज्ञापन, मंगलसूचना। -स्थली-स्त्री० मंगल- गया हो, अच्छा हो गया हो, भरा, पूजा घाव । भूमि; यशस्थल ।
शुष्कता-स्त्री० [सं०] नीरसता; कठिनता, हृदयहीनता; शुभांग-वि० [सं०] सुंदर ।
व्यर्थता । शुभांगी-वि० स्त्री० [सं०] सुंदरी (नारी) । स्त्री० रति । । शुष्कांग-वि० [सं०] जिसका शरीर सूख गया हो, दुबलाशुभा-पु०दे० शुबहा' । स्त्री० [सं०] शोभा, सौंदर्य, दीप्ति, | पतला । पु० धव वृक्ष ।। कांति; कामना, इच्छा; देवसभा।
शुष्का, शुष्काईक-पु० [सं०] सोंठ, गुंठी । शुभाकांक्षी(क्षिन्)-वि० [सं०] हितैषी, हितेच्छु । शुहदा-पु० [अ०] गुंडा; बदमाश, बदचलन । -पन,शुभागमन-पु० [सं०] मंगलप्रद, सुखद आगमन । पना-पु० गुंडई; बदमाशी। शुभानुष्ठान-पु० [सं०] मांगलिक कर्म ।
शुहरत-स्त्री० [अ०] ख्याति, प्रसिद्धि; चर्चा; नेकनामी शुभावह-वि० [सं०] मंगलकारी।
बदनामी (देना, पाना, होना)। शुभाशीर्वाद-पु० [सं०] मंगलकारी आशीर्वचन ।
शूक-पु० [सं०] किसी वस्तुका चिकना नुकीला अग्रभाग; शुभाशीष-पु० दे० 'शुभाशीर्वाद ।
जौ आदिका नुकीला अग्रभाग, जौ आदिकी बालका शुभ्र-वि० [सं०] उज्ज्वल देदीप्यमान, चमकीला सफेद। नुकीला हिस्सा, हूँड, शिखा, दया; जल-मल में पैदा होनेपु० श्वेत वर्ण, सफेद रंग; चंदन, अभ्रक, अबरक; सेंधा वाला जहरीला कीड़ा; (पिन) दे० 'कटिका'। -धानीनमक; चाँदी; कसीस । -कर-पु० (श्वेत किरणोंवाला)। स्त्री० (पिनकुशन) दे० 'कंटिकाधार'। -धान्य-पु० चंद्रमा कपूर । -भानु-पु० चंद्रमा। -रश्मि-पु० । ट्रॅडवाले अनाज (जैसे-जौ आदि)। -पत्र-पु० विषचंद्रमा।
हीन स। -पिंडी,-शिंबा,-शिंबी-स्त्री० केवाँच,
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