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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir अनुनादित-अनुमोदित अनुनादित-वि० [सं०] प्रतिध्वनित, जिसकी गूंज हुई हो। अनुबद्ध-वि० [सं०] संबद्ध,लगाव रखनेवाला ।-करनाभनुनासिक-वि० [सं०] जिसका उच्चारण मुँह और स० क्रि० (टु एनेक्स) अंतमें जोड़ना, साथमें रखना या नाकसे हो-(ङ, ञ, ण, न, म और अनुस्वार )। पु० मिला देना। अनुनासिक वर्ण । अनुबल-पु० [सं०] पीछे स्थित रक्षक सेना; पृष्ठरक्षक सेना अनुन्नत-वि० [सं०] जो ऊपर उठाया न गया हो; जिसने (रेयर गार्ड )। उन्नति न की हो। अनुबोध-पु० [सं०] स्मरण; पीछे होनेवाला स्मरण । अनुन्मुक्त-वि० ( अन-डिस्चार्जड) (वह ऋण) जिसका अनुभव-पु० [सं०] प्रत्यक्ष ज्ञान, देख-सुनकर या प्रयोगपरिशीधन न किया गया हो; (वह बंदी) जो कारागृहसे परीक्षासे प्राप्त ज्ञान, मनसे जानना; संवेदन, महसूस मुक्त न किया गया हो। करनाः सुख-दुःखरूपमें उपलब्धि । -सिद्ध-पु० अनुअनुपम-वि० [सं०] उपमारहित, बे-जोड़, सर्वोत्तम ।। भव करके देखा हुआ; परीक्षा-सिद्ध । अनुपमेय-वि० [सं०] अतुलनीय । अनुभवना*-स० क्रि० अनुभव करना। अनुपयुक्त-वि० [सं०] अयोग्य; अनुचित नामोज । अनुभवी (विन)-वि० [सं०] अनुभव रखनेवाला, निकम्मा । तजुबेकार; भुक्तभोगी। अनुपयोग-पु० उपयोगी न होना; उपयोगमें न आना। अनुभवोक्ति-स्त्री० ( मैक्सिम) अनुभवके आधारपर कही अनुपयोगिता-स्त्री० [सं०] उपयोगी न होना, निरर्थकता। जानेवाली बात, कहावत आदि । अनुपयोगी (गिन्)-वि० [सं०]उपयोगरहित, बे-मसरफ । | अनुभाव-पु० [सं०] मनोगत भावकी सूचक बाह्य क्रियाएँ अनुपलब्ध-वि० [सं०] अप्राप्त; जो जाना न गया हो। । (सा०); प्रभाव; बड़ाई; संकल्प; दृढ़ विश्वास । अनुपलब्धि-स्त्री० [सं०] अप्राप्ति; जानकारी न होना। अनुभावक-वि० [सं०] अनुभव करानेवाला । अनुपस्थित-वि० [सं०] जो सामने या पासमें न हो, अनभावन-पु० सं०] अंगभंगी द्वारा मनोगत भावोंको गैरहाजिर, अविद्यमान । व्यक्त करना। अनुपस्थिति-स्त्री० [सं०] अविद्यमानता, गैरहाजिरी। । अनुभावी (विन)-वि० [सं०] अनुभव करनेवाला; अनुपात-पु० [सं०] सापेक्षिक संबंध; तीन ज्ञात संख्याओंके चश्मदीद गवाह; भावजन्य चिह्न प्रकट करनेवाला; पीछे आधारपर चौथीको निकालना; त्रैराशिक (गणित); एकके | होने या आनेवाला। . बाद दूसरेका गिरना; अनुसरण ।। अनुभूत-वि० [सं०] अनुभव किया हुआ; आजमाया अनुपातक-पु० [सं०] ब्रह्महत्यादि महापातकोंके बराबरके हुआ, परीक्षित । पाप-चोरी, हत्या, परस्त्रीगमनादि । अनुभूति-स्त्री० [सं०] अनुभव; समवेदना प्रत्यक्ष, अनुअनुपाती प्रतिनिधित्व-दे० 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' । मिति, उपमिति और शब्दबोध द्वारा प्राप्त ज्ञान (न्या०)। अनुपान-पु० [सं०] दवाके साथ या पीछे ली जाने- अनुभूतिवाद-पु० (एम्पीरिसिज्म) पूर्वज्ञात बातों आदिपर वाली वस्तु । नहीं, केवल अनुभव तथा परीक्षणादिपर आश्रित तत्त्ववाद । अनुपालन-पु० [सं०] रक्षण; आशापालन, मानना। अनुभोग-पु० [सं०] उपभोग सेवाके बदले मिलनेवाली अनुपूरक-पु० (सप्लिमेंट) वह अंश जो छूटी हुई बात या माफी जमीन।। कोई कमी पूरी करनेके लिए बादमें जोड़ा जाय। वि० | अनमति-स्त्री० [सं०] स्वीकृति, इजाजत । -पत्र-पु० (सप्लिमेंटरी) जो कमी रह गयी हो उसे पूरा करनेके लिए जा कमी रह गया हो उस पूरा करनेक लिए स्वीकृति-सूचक पत्र या लेख। जो बादमें रखा जाय, जोड़ा जाय, प्रकाशित किया जाय, | अनुमरण-पु० [सं०] सती होना, सहमरण । पूछा जाय । -प्रश्न-पु० कोई प्रश्न पूछनेके बाद छटी अनुमाता (तृ)-वि० [सं० ] अनुमान करनेवाला । हुई बात या तत्संबंधी अन्य जानकारी प्राप्त करनेके लिए | अनुमान-पु० [सं० ], अटकल, अंदाज; प्रत्यक्षसे अप्रउसी सिलसिले में पूछा गया प्रश्न । त्यक्षका ज्ञान ( धुआँ देखकर आगका ज्ञान), न्यायशास्त्रके अनुपूर्व-वि० [सं०] क्रमबद्ध, सिलसिलेवार । माने हुए चार प्रमाणोमेंसे एक; अनुमति, स्वीकृति । अनुपूरित-वि० (सप्लिमेंटेड) जो कोई कमी, छूट आदि । -ता-पु० अनुमानसे, अंदाजन ।। पूरी करने के लिए बादमें जोड़ा, रखा या प्रकाशित किया | रखा या प्रकाशित किया | अनुमानना*-स० क्रि० अनुमान करना,सोचना; समझना। गया हो। अनुमित-वि० [सं०] अनुमान किया हुआ। अनुपूरण-पु० (सप्लिमेंट) छूट, कमी आदि पूरी करनेके अनुमेय-वि० [सं० ] अनुमान करने योग्य । लिए बादमें कुछ बढ़ाना या मिलाना । अनुमोदक-वि० [सं०] अनुमोदन, समर्थन करनेवाला। अनुप्राणन-पु० [सं०] प्राणसंचार, प्रेरण, स्फूर्ति । । अनुमोदन-पु० [सं०] प्रसन्न करना या होना; समर्थन; । अनुप्राणित-वि० [सं०] जिसे जीवन या स्फूति दी गयी। स्वीकृति: पु० (ऐप्रह्वल) किसीके कार्य, मत या प्रस्तावको हो प्रेरित समर्थित पोषित । ठीक मानते हुए अपनी सहमति प्रकट करने या उसका अनुप्रास-पु० [सं०] एक शब्दालंकार जिसमें वर्ण-विशेष समर्थन करनेकी क्रिया ।। या वर्ग-विशेषके व की आवृत्ति होती है; वर्णसाम्य । अनुमोदित-वि० समर्थितः (ऐबड) (कार्य या प्रस्ताव) अनुबंध-पु० [सं०] बंधन; संबंध; सिलसिला; आरंभ जिसका किसीने अनुभोदन किया हो या ठीक समझकर नतीजा; मार्ग; क्षुद्रांशा संबंध जोड़नेवाला । स्वीकार कर लिया होः प्रसन्न किया हुआ। For Private and Personal Use Only
SR No.020367
Book TitleGyan Shabdakosh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyanmandal Limited
PublisherGyanmandal Limited
Publication Year1957
Total Pages1016
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size28 MB
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