SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 163
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org [ 147 ] A fragment of the Daśavaikälika, the second Müla Sutra of the 'aina Sacred Canons. Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir The Ms begins Fol 72. कप्पियं दितिय पडियाइक्खे नाम कप्पिइ तारिस ॥ असण पाणगळ वा विखाइम' साइम तथा अगणि मिहुज्ज निखितं तं च संघटिया दए ।। ६१ त' भवे भत्तपाण' तु संजयाय अकप्पिय दितिय पडियाइक्खे नाम कप्पह तारिस ॥ पंचउ सिक्किया सिक्किया उज्जा लिया निव्वाव्वियाउ + चिया निसिन्चिया उवत्तिया उवारिया दए त भावभव्वा ॥ + जकटूठ सिल वावि इट्टाल वावि एगया + वियं स कमटठाए त च कुज्ज चलाचल' || न तेण भिक्खू गच्छिज्जा दिट ठो तत्थ असंजमो गंभीर सिर' चैव सव्विदिय समाहिए । निस्सेणि फलग पीठ' ऊसवित्तागमारु हेम च कीलं च पासायें समणटठ एव दायए ।। तहेव सत्तु चुन्नाइ कोल चुन्नाइ आवणे सक्क ु लि ं फाणिय' + य अन्न वावि तहाविह || विक्कायमाण ं पसढ़' रएण परिफासिय दितिय' पडियाइकन मे कप्पर तारिस ॥ बहु ट ठ पुग्गल अणमिस वा बहुकंटय अस्थिय ते दुयं विल्ल उछु क्ख'ड' च सिंवलि ॥ The Ms ends Fol 41b. थेरा विईए जामेसु तत्थ विभवेणासु अइ निउणा जेग्गति अप्पमत्ता अवट ठ भणमाइ परिमुक्का || अबुछिन्ना तसापणो पढ़िलेहा न सुज्झई तम्हाह च समत्तस अवभो न कप्पई ॥ संचर कुथा दहियभूया बोहा तहेव दालीय घेर कोवि इलिया सप्पे वीसुं हरजं दारसरडे | अतर तस्स उपासागाढं दुक्खति तेण अवटठौं भो संजय पिवत्थं भो सलहा कुदुविटीय ॥ पत्त मिश्र + रत्ते काल गिहिइ गुरू विवोहिति ॥ COLOPHON. इति श्रीदशवेकालिक श्रुतस्कंध समाप्तः 6735 ( II ) षडजीवनिकायधर्मप्रज्ञप्ति Sadjivanikāyadbarmaprajñapti Substance; Countrymade Paper Size : 13 in by 31 in ; Foll : 5; Nine Lines in a Page; Character: Jaina Devanagari; Appearance: discoloured; Complete. For Private and Personal Use Only
SR No.020281
Book TitleDescriptive Catalogue of Sanskrit Manuscripts Asiatic Society Vol 13 Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAjitranjan Bhattacharya
PublisherAsiatic Society
Publication Year
Total Pages293
LanguageEnglish, Sanskrit
ClassificationCatalogue
File Size12 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy