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३७. दशभूमिविधानम्. ३८. रुद्रभूमिविधानम्. ३९ भानुभूमिविधानम्४०. त्रयोदशतलविधानम्. ४१. षोडशभूमिविधानम्.
४२. मूर्धेष्टकविधानम्.
४३. प्राकारलक्षणम्.
४४. मण्टपलक्षणम्.
४५ गोपुरलक्षणम्.
४६. सप्तमातृकालक्षणम्
४७. विनायकलक्षणम्.
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४८. परिवारविधिः.
४९ लिङ्गलक्षणोद्धारः.
५०. उत्तमदशतालपुरुषमानम्.
५१. मध्यमदशतालपुरुषमानम्.
५२. उत्तमनवतालम्.
५३. मध्यमनवतालम्.
५४. अत्रमनवतालम्.
५५. अष्टतालम्.
५६. सप्ततालम्.
५७. पीठलक्षणोद्धारः. ५८. सकलस्थापनविधिः.
५९. सुखासनम्.
६०.
६१. चन्द्रशेखर मूर्तिलक्षणम्.
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६२. वृषवाहनमूर्तिलक्षणम्. ६३. नृत्तमूर्तिलक्षणम्.
६४. गङ्गाधर मूर्तिलक्षणम्. ६५. त्रिपुरमूर्तिलक्षणम्
६६. कल्याण सुन्दरलक्षणम्. ६७. अर्धनारीश्वरलक्षणम्. ६८. गजहमूर्तिलक्षणम्.
६९. पाशुपत मूर्तिलक्षणम्.
७०. कङ्काल नुर्तिलक्षणम्.
७१. हर्यर्धहरलक्षणम्.
७२. भिक्षाटनमूर्तिलक्षणम्.
७३. चण्डेशानुग्रहः.
७४. दक्षिणामूर्तिलक्षणम्. ७५. कालहमूर्तिलक्षणम्. ७६. लिङ्गोद्भवलक्षणम्.
७७. वृक्षसङ्ग्रहणम्,
७८. शूललक्षणम्.
७९. शूलपाणिलक्षणम्.
८०. रज्जबन्धलक्षणम्.
८१. मृत्संस्कारलक्षणम्. ८२. कल्कसंस्कारलक्षणम्.
८३. वर्णसंस्कारलक्षणम्.
८४. वर्णलेपन मेध्यलक्षणम्.
८५. ग्रामादिलक्षणम्.
८६. ग्रामलक्षणम्.
शशिधर महादेवं सर्वलोकैकनायकम् । माहेन्द्रमध्यगं शान्तं पार्वतीसहितं परम् ॥ देवदानवसिद्धाद्यैः सेवितं सुरपूजितम् । प्रणम्य देवचरणमेवं ब्रूयात् स काश्यपः ||
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