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अमृतसागर तथा मतापसागरतरंग कारोकिवाकारोगसंपूर्णम् अथसूत्ररोकिवाकारोगलिष्यते जो मनुष्यमूकी घाधारी केली के ये रोगहीय अंगकेफूटीडोय पथरीको रोगहोय लिगेंट्री के विषैपीडा होय कालीबालाकीसंधिपीडाहोय रगोलाफीयानें पादिलेर पाछेमलकारो किवाकाजोरोगकयाछेसोभीईमूत्रकारोकिवामैहोय ३ इतिमूत्रकारोकिवाकारोगसंपूर्णम् अथडकाररोकिचाकारोगलिष्यते जोमनुष्यडकारच्यावतीनेरो केतकेइसगारोगहोयछे अरुचि सरीरकांपे हियोरुके माफरी षा सी. हिचकी रोगडकारकारी किवाकरिकें होय ४ इतिडकाररो किचाकारोग: संपूर्णम् अथछींक रोकिवाकारोगलिष्यते जोपु रुषछींक कावेगनैराकैनीकैयरोग होय है मथनाय होय अरसरी रकीसारी इंद्रा दुर्बल होजाय परगरदनमुडैनहीं गुषकेक्यूवाकाप लोहीयज्ञाय ५ इतिछींकरोकिवाकारोगसं• अथतिसरोकिया वारोगलिप्यते पुरुषनैतिसलागी होयचरतीनेोरीकेतीये रोगहोय मुषसो होय सर्वत्र्मंगमें फूटणीहोय बहरापगोहोय परमोहहोयत्र्याचे भ्रमहोयत्र्याचे रहियोषे ६ इतितिसरोकि बाकारोगसं• अथभूषरोकिवाकारोगलिष्यते जोपुरुषभूष कावेगनैरी कैमीकेतनारोग होय सबअंगदूटिवालागजाय श्ररु चिहीयत्र्या श्ररसर्वचस्तउपरिग्लानिहोजाय अरसरीरसहोजा य सूलचा श्ररभमहोयद्यावे अरविनाश्रमहीमहीया रसर्वइंइिसिथलहोजाय अरसरीरको एरिहोजाय ७ इतिभू षकारो किवाकारोगसं० प्रथनींदोकिवाकारोगलिष्यते ना मनुष्यनींदच्यावतीनेंरोकै तीकैयेनारोगहोय वेंकेमोहहायत्र्याचे मांथोम्प्ररमषिभारीहोयजाय श्रालसत्र्यविउवासीय संपा डाहोय -
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