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________________ जोगिविक्खंभसूचीओ संखेज्जगुणाओ। वचिजोगिविक्खंभसूई विसेसाहिया। सेढी असंखेज्जगुणा । तदो वेउन्विमिस्सकायजोगिमिच्छाइट्ठिदव्वमसंखेज्जगुणं । सच्चमणजोगिदव्वं संखेज्जगुणं। एवं मोसमणजोगि-सच्चमोसमणजोगि-असच्चमोसमणजोगिदव्वाणि जहाकमेण संखेज्जगुणाणि। मणजोगिदच्वं विसेसाहियं । सच्चवचिजोगिदव्वं संखेज्जगुणं। एवं मोसवचिजोगि-सच्चमोसवचिजोगिवेउव्वियकायजोगि-असच्चमोसवचिजोगिदव्वाणि जहाकमेण संखेज्जगुणाणि । तदो वचिजोगिदव्वं विसेसाहियं । पदरमसंखेज्जगुणं। लोगो असं खेज्जगुणो। तदो अजोइणो अणंतगुणा। कम्मइयकायजोगिणो अणतगुणा। ओरालियमिस्सकायजोगिणो असंखेज्जगुणा। ओरालियकायजोगिणो मिच्छाइट्ठी संखेज्जगुणा। -षट् ० खण्ड ० १ । २ । सू १४३ । पु ३ । पृष्ठ० ४०८-१३ स्वस्थान आदि के भेद से अल्पबहुत्व तीन प्रकार का है। उनमें से स्वस्थान अल्पबहुत्व प्रकृत है। पाँच मनोयोगी, तीन वचनयोगी, वैक्रिय काययोगी और वैक्रियमिश्र-काययोगियों का स्वस्थान अल्पबहुत्व देवगति के समान हैं। वचनयोगी और अनुभयवचनयोगियों का स्वस्थान अल्पबहुत्व पंचेन्द्रिय तिर्यंच पर्याप्तों के स्वस्थान अल्पबहुत्व के समान है। शेष काययोगियों में मिथ्यादृष्टि जीवों के स्वस्थान अल्पबहुत्व नहीं पाया जाता है। उन्हीं के सासादन सम्यग्दृष्टि, सम्यग्मिथ्यादृष्टि, असंयतसम्यग्दृष्टि और संयतासंयतों का स्वस्थान अल्पबहुत्व ओघ अल्पबहुत्व ओघ स्वस्थान अल्पबहुत्व के समान है। अब पर स्थान में अल्पबहुत्व प्रकृत है । १-अनुभय मनोयोगी चारों गुणस्थानवर्ती उपशामक सबसे थोड़े हैं। अनुभय मनोयोगी चार गुणस्थानवर्ती रूपक उपशामकों से संख्यातगुणे हैं । अनुभय मनोयोगी सयोगि केवली जीव उक्त क्षपकों से संख्यातगुणे हैं। अनुभय मनोयोगी अप्रमत्त संयत जीव उक्त सयोगी केवलियों से संख्यातगुणे हैं। अनुभय मनोयोगी प्रमत्त संयत जीव उक्त अप्रमत्त संयतों से संख्यातगुणे हैं। अनुभय मनोयोगी असंयत सम्यग्दृष्टियों का अवहारकाल उक्त प्रमत्त संयतों से असंख्यातगुणा है। अनुभय मनोयोगी सम्यमिथ्यादृष्टियों का अवहारकाल उक्त असंयत अवहारकाल से असंख्यातगुणा है। अनुभय मनोयोगी सासादन सम्यग्दृष्टियों का अवहारकाल उक्त सम्यमिथ्यादृष्टि के अवहारकाल से असंख्यातगुणा है। अनुभय मनोयोगी संयतासंयतों का अवहारकाल उक्त सासादन सम्यग्दृष्टि अवहारकाल से असंख्यातगुणा है। उन्हीं अनुभय मनोयोगी संयतासंयतों का द्रव्य उन्हीं के अपहारकाल से असंख्यातगुणा है। अनुभय मनोयोगी सासादन सम्यग्दृष्टियों का द्रव्य उक्त संयतासंयतों के द्रव्य से असंख्यातगुणा है। अनुभय मनोयोगी सम्यमिथ्यादृष्टियों का द्रव्य उक्त सासादन सम्यग्दृष्टियों के द्रव्य से संख्यातगुणा है । Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016029
Book TitleYoga kosha Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMohanlal Banthia, Shreechand Choradiya
PublisherJain Darshan Prakashan
Publication Year1996
Total Pages478
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size24 MB
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