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________________ पर अहिंसा पर अहिंसा-अहिसा १ २१६ ब । पर आकार -- सप्तभंगी ४.३२२ अ । पर उपकार उपकार १४१४ ब १.४१५, उपदेश १.४२५ अ १४२६ ब कर्ता-कर्म २२३ अ । पर कालकाल २५० अ चतुष्टय २२७८ व सप्तभंगी , ४.३२२ अ । परकृति- ३ ११ व । पर क्षेत्र क्षेत्र २१९१ व अ, ससार ४ १४७ अ 1 - २.१६२ अ चतुष्टय २.२७८ ४१४५ अ सप्तभगी ४३२१ परघात नामकर्म प्रकृति-३११ ब प्ररूपणा - प्रकृति ३८८२५८२, स्थिति ४.४६५, अनुभाग ११५, प्रदेश ३.१३७, बन्ध ३९७, बधस्थान ३.१११, उदय १३७५, उदयस्थान १३६०, उदीरणा १४११ अ, उदीरणास्थान १.४१२, सत्त्व ४.२७८, सत्त्वस्थान ४३०३, त्रिसयोगी भग १.४०४, सक्रमण ४८४ व अल्पवस्व ११६१ ब । पर-चतुष्टय- सप्तभंगी ४३१७ व ४३१९ व ४३२१ 1 ब । पर चारित्र चारित्र २.२५२ व २२८३ अ । परतत्रता - कारण कार्य २६२ व कर्मोदय २.७१ ब । परतत्रवाद ३ १२ अ । परतत्र विवक्षा स्याद्वाद ४४६८ अ । परत्व ब । परगण चर्चा सत्से बना ४.३१० ब ४.३६१ अ । परगणानुपस्थापन परिहार प्रायश्चित ३३५ व । पर- निरपेक्ष- स्वभाव ४५०७ अ | पर ग्राम अभिघट्ट दोष जाहार १२६० व उद्दिष्ट परम अद्वैत - ३.१३ अ मोक्षमार्ग ३३२६ अ । 1 १४१३ अ । २.७१ व २.७३ ब -काल २८३ अ, पर ३.११ ब, परत्वापरत्व ३ १२ अ । परत्वापरत्व - ३१२ अ । परदेश- अभिघट दोष आहार १.२९० व उद्दिष्ट १.४१३ अ । परद्रव्य- ३.१२ अ चतुष्टय २२७८ अ, सप्तभवी ४३२१ ब | Jain Education International परद्रव्य-ग्राहक नय नय २५४५ व । परद्रव्य-रत- मिथ्यादृष्टि ३३०२ व परद्रव्यविरत उपदेश १.४२४ अ । पर- निदानिया २.५८७ व । पर-निमित्तक उत्पाद - आकाश १.२२१ ब, उत्पाद १.३५७ ब । १४५ पर-पक्षदूषक हेतु ४ ५४१ अ । पर पर्याय- पर्याय ३.४६ व पर-पुरुष - ब्रह्मचर्य ३ १९२ ब । परप्रकाशक ज्ञान २२५८ व दर्शन २.४०६ अ पर प्रत्यय उत्पाद - आकाश १२२१ ब, उत्पाद १.३५७ न । पर प्रशंसा - निदा २५६८ अ पर-ब्रह्म-मोक्ष ३३२५ अ । पर-भविक प्रत्यय - प्रकृतिबंध ३० व ३१० अ पर-भाव चतुष्टय २.२७८ अ, भाव ३२१८ व ससार ४ १४७ अ, सप्तभगी ४३२२ ब, सापेक्ष धर्म १ १०६ ब | -- परम -३ १२ ब, तत्त्व २३५३ अ, समयसार ४.३२६ अ । परम एकस्व - ३.१३ अ मोक्षमार्ग ३.३३६ अ परमऋषि - १४५७ ब । परम गुरु - गुरु २.२५१ ब । परम ज्ञान - मोक्षमार्ग ३३३६ अ परम ज्योति - ३.१३ अ मोक्षमार्ग ३ ३३६ अ परम तत्त्व-- ३१३ अ, परम ३.१२ ब, मोक्षमार्ग ३३३६ अ । 1 परम तत्वज्ञान ३१३ अ मोक्षमार्ग ३.३३५ ब । परम धर्मध्यान- मोक्षमार्ग २२२६ अ । परम ध्यान- ३.१३ अ मोक्षमार्ग २.३३६ म । परम निजस्वरूप मोक्षमार्ग ३.२३५ व परम निरुद्धमरण – सन्लेखना ४.३८६ अ । परम स्वास्थ्य - परम परम तत्त्व २३५३ अ । परम ब्रह्म ३१३ अ, ओम् १.४६९ व ब्रह्म ३१५८ अ मोक्षमार्ग ३.३३५ ब । - - परमभाव-ग्राहक नय नय २५४५ ब । परमभेदज्ञान - ३१३ अ, मोक्षमार्ग ३३३६ अ । परम विष्णु - ३१३ अ, मोक्षमार्ग ३.३३५ ब । परम वीतरागता ३१३ अ मोक्षमार्ग २ ३३६ अ परम समता - ३१३ अ, मोक्षमार्ग ३.३३६ अ । परमसमरसी भाव-३ १३ अ, मोक्षमार्ग ३ ३३६ अ । परम समाधि - ३१३ अ मोक्षमार्ग ३३३६ प्र । । For Private & Personal Use Only परम सुख - सुख ४.४३२ ब । परम स्वभाव सुख ४.४२१ अ । - - परम स्वरूप - ३.१३ अ । परम स्वाध्याय मोक्षमार्ग २३३६ अ । परम स्वास्थ्य - ३.१३ अ, मोक्षमार्ग ३.३३६ अ । www.jainelibrary.org
SR No.016012
Book TitleJainendra Siddhanta kosha Part 5
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJinendra Varni
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages307
LanguagePrakrit, Sanskrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size23 MB
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