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चपा - महिलानगर पुरम्मि,
कुडगामि जिण - जम्मण - रम्मि । सावत्थी - महुरापुर जाइ
करण - मणि-मोहराइ ||१९|| अब्बुअ - सिरि सच्चर - वरम्मि,
थं भणपुर - मोढरपुरम्म । अहिलवाड - वर-नयरम्मि,
सोइ सुदर - देवहरमि ||२०|| त असासय-सासय- चेइयाई,
रिसाइय- पडिम-पइठियाइ ।
सर्व-यैत्य- परिपाटि - स्वाध्याय
गामागर-पुर-नयरोईसु,
जे पणमइ' तहँ सहलउ दीसु ॥२१॥ त विहरइ संपइ वीस जिणिंद लोआलोअ - पयास-दिनिंद | धन्न पुन्न जे पिच्छइ निच्चु.
ताण जम्मु जीविउ कयकिच्चु ॥ २२ ॥ गणहर- सेणी सयल वि चौंग,
जेहिं विरइय बारस अंग । सिरि-जिणवर - परिवारु वि धन्नु,
मोक्ख- मग्गु पडिपुन्नु पवन्नु ||२३|| तं नंदउ चउवीसमउ जिणिंदु,
वद्धमाण- पहु भुवणाणंदु | नंदउ चउविह-संधु अणग्घु,
जसु पहावि जिण धम्मु अविग्धु ||२४|| दव्व - थउ भाव - थउ जि कुणंति,
ते अणंतु भव-दुहु निहणंति ।
सिरि-जिण - पहणिय-सयलुवसग्ग,
ते लहु लहिसइ सग्गऽपवग्ग ॥ २५ ॥ १
१. अत: - इति सर्व- चैत्य-परिपाटि - स्वाध्यायो रासेन दीयते, बोल्लिका भण्यते समाधिना ।
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