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________________ " पृष्ठ सं० पंक्ति सं० २१ २१ ३५ , ocococoCCC cWW०० ४४ ( २५) अशुद्धियां। . . शुद्धियां। गोलिये भाग पहली गोली पहला भाग । दूसरी इससे आधी दूसरा इससे आधा तीसरी इससे आधी तीसरा इससे आधा खाशरश्च करिंजश्च खादिरश्च करंजश्च - शुद्ध गुरुके गृहस्थाचार्य गुरुके माताको माताका नीरोरोता नीरोगता शुद्धि शुद्धि शूद्रों द्वारा धोबी कुम्हार आदि कारु शबोंद्वारा यज्ञोपवनीतको यज्ञोपवीतको और ओर अशौचान्ते आशौचान्ते दूरान्तमरणे पत्र यंत्रे मंत्र यंत्रमंत्रैः टट्टी होकर आनेपर सूतक शुद्धिके दिन मशान घाटके ऊपर जानेपर मुर्दा जलानेको जानेपर सीका मरण सुननेपर जातीय या गोत्रजका मरण' सुननेपर अपने कुटुंबीकी दूरसे या पास देशान्तरवर्ती ऋषियोंका मरण सुनने से मरणकी सुनावनी आनेपर पर और जीमते समय पचल फट तथा उनके जूठे पात्रोंसे छू जानेपर जानेपर मुखकृत सुखकृत . शद्रोंको इस उपर्युक्त शौचाचार शूद्रोंको इस उपर्युक्त संपूर्ण शौचाविधिका करना सुखकर नहीं है चार विधिका करना सुखकर नहीं है अर्थात् वे उपर्युक्त सम्पूर्ण शौचाचार विधि न कर अपने योग्य ही करें। शुद्धाः ययोपवीत यज्ञोपवीत दाहिने कंधेपर दूरात्तन्मरणे पात्र ४४ ४५ ४५ ४५ ५ ४७ ७ २१ ४८ ५९ ४९ १४ . दाहिने हाथमें
SR No.010851
Book TitleTraivarnikachar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Soni
PublisherJain Sahitya Prakashak Samiti
Publication Year
Total Pages438
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size16 MB
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