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: विषय.
स्वममें खाई हुई वस्तुका त्याग स्वममें ब्रह्मचर्यभंगका प्रायश्वित्त स्वममें माता आदिके संसर्गका प्रायश्चित्त मिथ्यादृष्टियों और शूद्रों के घरपर भोजन करनेका प्रायश्चित्त
दशवां- अध्याय |
व्रतग्रहण
जिनालय - गमन
गुरुके निकट जाना धर्मश्रवण- प्रार्थना
धर्मकथन
मिथ्यादर्शन
मिथ्यात्व के तीन भेद भद्र मिथ्यादृष्टिको देशना मिथ्यादर्शनके भेदपूर्वक दृष्टांत
सम्यक्त्वकी उत्पत्ति कारण हिंसादि तत्वोंका अश्रद्धान
आप्तका लक्षण अठारह दोष
शास्त्रका लक्षण
गुरुका लक्षण
सम्यक्त्वका स्वरूप
निःशंकितादि आठ अंगोंके लक्षण
सम्यक्त्वके पच्चीस मल
लोकमूढ़ता
देवमूढ़ता
पाषंडिमूढ़ता
आठमंद, छह अनायतन और
शंकादि आठ दोष
सम्यक्त्वके भेद
उनकी उत्पत्ति सम्यक्त्वके आठ गुण
सम्यक्त्व उत्पत्तिके क्षेत्र अणुव्रतादि ग्रहण और सम्यग्दृष्टिका गमन
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( १६ )
. पृष्ठ.
विषय.
२७६ क्षायोपशमिक और औपशमिक
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२७६
२७७ और चरणानुयोग
२७७ द्रव्यानुयोग
सम्यक्चारित्र
चारित्रके भेद
गृहस्थका लक्षण
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२७८ सम्यग्दृष्टिश्रावक २७८ आठ मूलगुण
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२७८ बारहवत २७९ पंच अणुव्रत
२७९ अहिंसाणुव्रत और अतीचार
सम्यक्त्वका स्वरूप
क्षायिक सम्यक्त्वका स्वरूप
सम्यक्त्व - प्रशंसा
२७९ सत्याणुत्रत और अतीचार
अचौर्याणुव्रत और अतीचार
ब्रह्मावत और अचार
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सम्यग्ज्ञानका लक्षण
प्रथमानुयोग, करणानुयोग
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२८१-८२
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२८० परिग्रहत्यागवत और अतीचार
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२८२ तीन गुणवत
२८२ दिग्वतका स्वरूप और अतीचार
२८३ अनर्थदंडवत
२८४
छह अणुव्रत
रात्रिभोजनत्याग अणुव्रत
अणुव्रत पालन करनेका फल
अनर्थदंडके पांच भेद प्रत्येकके लक्षण
२८५ अनर्थदंडके अतीचार २८६ भोगोपभोगपरिमाणवेत
भोग और उपभोगका लक्षण भोगोपभोगमै विशेष त्याग
पंच उदुंबर त्यागका कारण
. २८६ फलभक्षण त्याग
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