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________________ (२४), पृष्ठ १९७ . विषय. पृष्ठ, विषय. दानके भेद और उनका फल . १८. ठंडे और गर्म भोजनके गुण . . .. १९२ दशकुदान भोजनके विषयमें विशेष नियम १९३ दश- सुदान १८१ भोजनके अन्तराय १९३ दान न देने योग्य चीजें १८४ अष्टमूलगुण १९४ कुपात्रदान निषेध १८४ पंचोदुम्बरभक्षण निषेध १९४ मिथ्याशास्त्रोक्तदान निषेध . १८५ मद्यपान निषेध सात-क्षेत्र १८५ मद्यपायियोंकी अवस्था दानकी प्रशंसा या फल, १८५ मांसभक्षण निषेध . . . . भोजनविधि और पंक्तिभेद १८६ मधु-भक्षण-निषेध भोजनके अयोग्य स्थान १८६ मक्खनभक्षण-निषेध १९६ पंक्तिमें सामिल होने योग्य मनुष्य १८७ रात्रिभोजन और अनछने पंक्तिमें सामिल न होने योग्य मनुष्य १८७ जलपानका निषेध भोजनसमय मुखकर बैठने योग्य दिशाएं १८८ रात्रिभोजन त्यागके दोष चैकेकी रचना १८९ अहिंसावतकी रक्षार्थ रात्रिमें । चौकेके विना हानि १८९ चार प्रकारके आहारका त्याग सामिल भोजन करनेका निषेध १८९ रात्रिभोजनमें हानि कांसीके पात्रमें भोजन करनेका फल जलगालनवतके दोष १९८ पात्रका वजन मद्यत्यागवतके दोष १९८ पांच अंगप्रक्षालन कर भोजन ___ मांसत्याग, मुधुत्याग और . . भोजन करनेवालोंके पात्रोंका अंतर पंच उदंबरत्यागवतके दोष कांसी आदिके वर्तनोंके अभावमें पत्तों अन्य त्याज्य वस्तुएं द्विदलत्याग २०० भोजनके योग्य-अयोग्य पत्ते १९० भोजन के समय मौनोपदेश निषिद्ध पात्र १९. भोजनका प्रमाण भोजन परोसनेकी विधि हस्तमुखप्रक्षालन अमतीकरण, प्रोक्षण, परिषेचन, मंत्र, १९१ निषिद्ध भोजन आहूति मंत्र और ग्रासका प्रमाण १९१, पहले उठनेका निषेध शंखमुद्रासे जलपान और पंचप्राणाहूति . पंक्तिदोष-निराकरण २०२ मंत्र: १९१ भोजनके समय परस्पर स्पर्श करने अन्नका लक्षण १९२. का निषेध पात्रस्पर्श और भोजनग्रहण . २०२ १९२. मित्र आदिके निमित्त भोजन . " २०२ जलपान विधि और आदि मध्य . भोजनपात्र खाली छोडनेका निषेध अन्तमें जल पीनेका फल २०२ . १९२ कुरलेके विषयमें नियम में भोजन २०० २०१ १९० २०२
SR No.010851
Book TitleTraivarnikachar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Soni
PublisherJain Sahitya Prakashak Samiti
Publication Year
Total Pages438
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size16 MB
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