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________________ ७ श्राव अनंता. धनव्यधनंता १, सिध्यनंता १, वनस्पतिरा जीव अनंता ३, नव ||3|| जीव अनंता ४, पमिवार जीव अनंता परिश्रमण संसारमाही करें अने थनादि मि.. थ्यात्वी पिण संसारें नव जीव घणा में ४, कालव्य अनंतो में ए, पुद्गलव्य था नंता में ६, केवलझानरा पर्यायवा अनंता में , केवलदर्शनना पर्यावा अनंता.२७ ७ याठ धंधा जाणवा. जन्मघ १, जराधध,रात्रियंध ३, दिनयंध ४, क्रोधश्चंघ५, मानधंध ६. मायाधंध, सोनबंध '. श ७ श्रावगरे विषे उद्यमरो करवो ते नलो में. बागला पापकर्म खपावाने अर्थ उद्यम करें १, नवा पापकर्म नही उपार्जे एहवो उद्यम करें १, भागलो सूत्र नणीयो तेहने चिताखारो नद्यम करें ३, नवा सूत्र नणाववाने अर्थ उद्यम करें ५, नवा शिष्य साखा करवाने अर्थे नद्यम करें ५, बडे बागला शिष्य साखा जणावाने अर्थ जद्यम करें ६, चतुर्विध संघनो कलह मेटवाने अर्थे उद्यम करें , तप संयमने विषे वीर्य फोरवाने अर्थ उद्यम करें . ॥*|| G चोरंजीना आरंन कीयां श्राव प्रकाररो पाप लागें. फरसेंजिरा मुश्खनो संयोग मेली
SR No.010805
Book TitleChattrish Bol Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAgarchand Bherudan Sethia
PublisherAgarchand Bherudan Sethia
Publication Year1916
Total Pages369
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size10 MB
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