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________________ (58) का पाक मेरे गेहूं और उनका पकाना तथा मेरी और इनका संबन्धी नोंके दाता परमे श्रार्यमतलीला ॥ मसूर अन्य प्रश्न ये सब श्वर से समर्थ हों" यजुर्वेद अध्याय १८ ऋचा २६ मेरा तीन प्रकारका भेड़ों वाला और इससे भिन्न सामग्री मेरी तीन प्रकार की भेड़ों वाली स्त्री और इनसे उत्प । ( नोट ) "यज्ञेन कल्पन्ताम् ” - हम वाक्यका अर्थ स्वामीजीने यह किया है सब अन्नों के दाता परमेश्वर से ममर्थहों यजुर्वेद अध्याय १८ ऋचा १४ "मेरा अग्नि और बिजली आदि [ 'ष' शब्द का अर्थ बिजुली आदि किया है ] मेरे जल और जलमें होने वाले रत्न मोती आदि [ 'च, शब्दका अर्थ जल में होने वाले रत्न मोती आदि किया है ] मेरे लता गुच्छा और शाक आदि मेरी मोममता आदि औषधि | और फल पुष्पादि मेरे खेतों में पकते हुए अन्न आदि और उत्तम अन्न मेरे जो जंगल में पकते हैं व अन्न और जो पर्वत आदि स्थानों में पकने योग्य हैं | हुए घृतादि मेरे खंडित क्रियानों में |हुए दिनों को पृथक करने वाला और इसके संबन्धी मेरी उन्हीं क्रियाथों को प्राप्त कराने हारी गाय आदि घौर उसको रक्षा मेरा पांच प्रकार की भेड़ों बाला और उसके घृतादि मेरी पांच प्रकार की मेड़ों वाली जी और इसके उद्योग यदि मेरा तीन बड़े वाला और उनके बड़े आदि मेरी तीन बछड़े वानी की और उस के घृतादि मेरा चौथे वर्ष को प्राप्त हुवा बेलादि इमको कान में खाना मेरी चौथे वर्ष को प्राप्त गौ और हम की शिक्षा यह सब पदार्थ पशुओं के पालन के द्विधान में समर्थ होवें [ यज्ञेन कल्पन्ताम ] इस वाक्य का अर्थ- पशुओं के पालन के विधान ते ममर्थ होवें किया है ] शुर्वेद अध्याय १८ ऋषा २७ मेरे पीठ से भार उठाने हारे हाथी ऊंट आदि और उनके संबंधी मेरी पीठसे भार उठाने हारी घोड़ो ऊंटनी और उनसे उठाये गये पदार्थ मेरा वीर्य सेवन में समर्थ वृषभ और वीर्य धारकरने वाली भौ आदि मेरी बंध्या बोय्यंहीन बैल मेरा समर्थ मेरे गांव में हुए गौ आदि और नगर में ठहरे हुए [ 'च, शब्द का अर्थ नगर में ठहरे हुये किया है ] तथा मेरे बन में होनेहारे मृग आदि और सिंह आदि पशु मेरा पापा हुआ पदार्थ और मय धन मेरी प्राप्ति और पाने योग्य मेरा रूप और नाना प्र कार का पदार्थ तथा मेरा ऐश्वर्य और उसका साधन ये सब पदार्थ मेल करने योग शिल्पविद्या से समर्थ हों [ यज्ञेन । गी और कल्पन्ताम् ] इस वाक्य का अर्थ मेन बैल और बलवती गौ मेरी गर्भ गिकरने योग्य शिल्पविद्या से समर्थ हों। | किया है ] राने बाली और मामर्थ्य होन गौ मेरा हल और गाड़ी आदि को चलाने
SR No.010666
Book TitleAryamatlila
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherJain Tattva Prakashini Sabha
Publication Year
Total Pages197
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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