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२४ - सम्यक्त्वपराक्रम (१)
अपनी आदत नही बदल सकते तो धीरे-धीरे सुधारने का प्रयत्न करो । अगर तुम अपनी आदतो की दिशा बदल लोगे तो माना जायेगा कि तुम सुधर रहे हो ।
कहने का आशय यह है कि जब अपनी शक्ति पर बरावर विचार नही किया जाता तव उसी शक्ति से विप - ' रीत कार्य हो जाता है और जब बरावर विचार किया जाता है तो अनुकूल कार्य होने लगता है । जैसे शरीर का महत्व न समझने के कारण शरीरहित के विरुद्ध कार्य होने लगता है, उसी प्रकार शास्त्र का मर्म न समझने के कारण उसके विरुद्ध कार्य हो जाना स्वाभाविक है । अतएव महात्माओ द्वारा शास्त्र का भर्म समझो तो कल्याण होगा ।