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________________ MCG0-34 दी-- -- - --- श्रीगुणचंद लंबिवत्थखंड कहपि पत्रणकंपिजमाण कंटए विलग्गिऊण निवडियं, सामीवि थेवं भूमिभागं गंतूण अत्थंडिले पडियं पसंसदि महावीरच० होजत्ति मणागमेत्तं वलियकंधरो तमवलोइऊण जहाभिमयं गंतुं पत्तो । सो व पिउवयंसो पुठभणियवंभणो चिर- विप्रोक्तं ५ प्रस्तावः शकालेण तं निवडियं वत्थखंड पहिद्वचित्तो गिण्हिऊण भयवंतं च बंदिता कुंडग्गामनयरसुवगंतण पुवमणियतना-भगवत्तम्। ॥१५८॥ गस्स समप्पेइ। तुन्नागोऽवि अइनिउणं तुन्निऊण एगरूवं विरएइ। तओ सो बंभणो देवदूसं आदाय गओ नंदिवद्धण नराहिवस्स समीये, पणामियं तं वत्थं, राणावि कोऊहलनुवहंतेण सुचिरं पलोइऊण भणियं-भद्द! एवंविहं पवरहै वत्थं कत्य तए पावियं ?, वंभणेण भणियं-देव ! यहई एयस्स कहा, राणावि भणियं-वीसत्यो सम्मं साहसु, तओ है। जह दालिदोवहओ सुचिरं देसंतरेसु भमिऊण । नियमंदिरमणुपत्तो गिहिणीए तजिओ पुर्व ॥ १॥ जन जिणनाहो करुणखरेहिं गंतूण भूरि विनविओ । अणुकंपाए तेणं जह दिन्नं देवदूसद्धं ॥ २॥ जह तुनाएण पुणो दूइजवत्थद्धलाभकजेण । जयगुरुणोचिय पासे सिक्खविउं पेसिओ सहसा ॥३॥ जह संवच्छरमेगं पुलुिमि ठिओ पुरागराईसु । सिस्सो इव परिभमिओ जयपहुणो विहरमाणस्स ॥४॥ जह वा सुवण्णकूलानईए कंटग्गलग्गवत्थद्धं । चइऊण गए नाहे तयं च गहिऊण चलिओ य ॥५॥ 18॥ १५८॥ जह तुन्नागेण तयं दुखंडसंसीवणेण मेलवियं । तह सयलं नरवइणो निवेइयं तेण सविसेसं ॥६॥ एवं च निसामिऊण तुट्टो नंदिवद्धणनरिंदो दीणारलक्खमेगं वत्थस्स मुलं दाविऊण सबहुमाणं सक्कारिऊण । -- - -- --- -SCREENSE - -
SR No.010405
Book TitleMahavira Charitam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGunchandrasuri
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1929
Total Pages708
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size277 MB
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