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________________ आहार के १०६ दोष मुनि १०६ दोष टाल कर गोचरी करे यह भिन्न-भिन्न सूत्रो के आधार से जानना। आचारांग, सूअगडांग तथा निशीथ सूत्र के आधार से ४२ दोष कहे जाते है। १ आधाकर्मी-मुनि के निमित आरम्भ करके बनाया हुआ। २ उद्देशिक-अन्य मुनि के निमित बनाया हुआ आधाकर्मी आहार। ३ पूति कर्म-निर्वद्य आहार मे आधाकर्मी अंश मात्र मिला हुआ होवे वह तथा रसोई मे साधु के निमित्त कुछ अधिक बनाया हुआ होवे। ४ मिश्र दोष-कुछ गृहस्थ निमित्त, कुछ साधु निमित्त बनाया हुआ मिश्र आहार। ५ ठवणा दोष-साधु निमित रक्खा हुआ आहार । ६ पाहड़िय-मेहमान के लिए बनाया हुआ (साधु निमित्त) (मेहमानो की तिथि बदली होवे)। ७ प्रावार-जहा अन्धेरा गिरता हो, वहा साधु निमित खिड़की आदि करा देवे। ८ क्रीत - साधु निमित्त खरीद कर लाया हुआ। ६ पामिच्चे-साधु निमित्त उधार लाया हुआ। १० परियडे-साधु निमित्त वस्तु बदले मे देकर लाया हुआ। ११ अभिद्रुत-अन्य स्थान से सामने लाया हुआ। १२ भिन्न-कपाट चक आदि उघाड कर दिया हुआ। १३ मालोहड-माल (मेढ़ी) ऊपर से कठिनता से उतारा जा सके वह। ४६४
SR No.010342
Book TitleJainagam Stoak Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMaganlal Maharaj
PublisherJain Divakar Divya Jyoti Karyalay Byavar
Publication Year2000
Total Pages603
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size19 MB
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